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जनवरी, 2025 की पोस्ट दिखाई जा रही हैं
  नैना एक पढ़ी-लिखी, आत्मनिर्भर बनने का सपना देखने वाली लड़की थी। उसकी चाहत थी कि वह खुद के पैरों पर खड़ी हो, कुछ करे, अपनी पहचान बनाए। लेकिन उसके माता-पिता परंपरागत सोच वाले थे। वे एक ग्रामीण लेकिन अच्छे और प्रतिष्ठित परिवार से थे, और जब नैना के लिए एक धनी शहर में रहने वाले परिवार से रिश्ता आया, तो उन्होंने बिना उसकी सहमति के शादी तय कर दी।नैना के ससुराल वाले बहुत अमीर थे, लेकिन उनका घमंड उनकी दौलत से भी बड़ा था। शादी के बाद, नैना को जल्दी ही एहसास हो गया कि उसका पति आयुष शराब का आदी है और छोटी-छोटी बातों पर गुस्सा करता है। पहले तो उसने सोचा कि समय के साथ सब ठीक हो जाएगा, लेकिन जब पहली बार आयुष ने उस पर हाथ उठाया, तो उसका दिल टूट गया।उसने अपने माता-पिता को इस बारे में बताने की कोशिश की, लेकिन फिर उसने सोचा कि वह यह सब जानकर बहुत दुखी हो जाएंगे ।वह चुप रही  यह सोचकर कि शायद हालात बदलेंगे। लेकिन समय के साथ चीजें और बिगड़ती गईं।एक दिन नैना की मां उसके पिताजी से कहती है कि"6 महीने होने को आए बिटिया की शादी को। जब भी उसे बुलाने को कहो तो ससुराल वाले कोई न कोई बहाना बना देते हैं। व...

गलती

  रागिनी के घर पर शादी का माहौल था,बिटिया की शादी थी। घर मेहमानों से भरा हुआ था। हर तरफ रौनक और चहल-पहल थी। संगीत की धुन, खिलखिलाते चेहरे और मिठाइयों की मिठास ने माहौल को और भी खुशनुमा बना दिया था। लेकिन रागिनी उलझन में नजर आ रही थी।आज उसकी बेटी अपनी नई जिंदगी की शुरुआत करने जा रही थी, लेकिन रागिनी के दिल के एक कोने में एक  बात कांटे की तरह चुभ रही थी। उसके  सभी रिश्तेदार शादी में पहुंचे थे, लेकिन दुल्हन के मामा अभी तक नहीं आए थे। खासकर शगुन का सामान न लाने की चर्चा ने रागिनी को बेचैन कर दिया था। मेहमानों में फुसफुसाहट शुरू हो गई थी।“मामी जी, मामा जी शगुन लेकर नहीं आए? कुछ हुआ है क्या?” किसी ने पूछ लिया।वह मुस्कुरा कर बात को टाल गई,लेकिन अंदर ही अंदर उसका दिल धड़क रहा था। उसे समझ नहीं आ रहा था कि इस सवाल का क्या जवाब दे। अगर वे लोग नहीं आए तो शादी में मामा की रश्म कौन निभाएगा?क्या इज्ज़त रह जाएगी उसकी सबके सामने?उसने खुद से ही सवाल किया, “क्या मेरी सालों पुरानी गलती का असर आज भी है? क्या वे अब भी मुझसे नाराज हैं?रागिनी अपने परिवार की सबसे बड़ी बेटी थी। उसके दो छोटे भाई थे...

सम्मान

शहर के प्रतिष्ठित सभागार में तालियों की गड़गड़ाहट गूंज रही थी। राज्य सरकार द्वारा 'बेस्ट टीचर' का सम्मान पाने वाली अर्चना मेहरा मंच पर खड़ी थीं। उनकी आंखों में खुशी और गर्व के साथ-साथ पुरानी यादों का समंदर भी उमड़ रहा था। उन्होंने माइक के सामने खड़े होकर कहा, "यह सम्मान मेरे अकेले का नहीं है। यह मेरी सासू मां के विश्वास और प्रोत्साहन का परिणाम है।यह पुरस्कार  मै उन्हें समर्पित करती हूं।  उनकी सीख ने मुझे सिखाया कि परिस्थितियां चाहे कैसी भी हों, अपने सपनों को जीने का हौसला कभी नहीं खोना चाहिए।"इसके बाद अर्चना अपने स्थान परआकर बैठ जाती हैं। कार्यक्रम आगे बढ़ता है लेकिन अर्चना अपने अतीत में खो जाती हैं। अर्चना का जीवन साधारण लेकिन संघर्षों से भरा था। तीन बहनों में सबसे बड़ी अर्चना बचपन से ही पढ़ाई में होशियार थीं। उनका सपना था कि वे एक  शिक्षक बनें। लेकिन उनके माता-पिता ने एक अच्छे घराने से रिश्ता आने पर उनकी पढ़ाई के सपने को नजरअंदाज कर शादी कर दी। उसे आज भी अच्छी  तरह याद है वह दिन जब उसका बी ए फाइनल का परिणाम निकला था।"मां मैं फर्स्ट डिवीजन में पास हो गई। कॉलेज क...

बेटियां

शाम का वक्त था।सुनीता चाय का कप लेकर पीने बैठी थी, लेकिन घर की दीवारों से ऊपरी मंजिल पर से आने वाली तेज़ आवाज़ें पूरे माहौल को असहज कर रही थीं। वहां उसकी जेठानी सरिता का परिवार रहता था।सास और बहू के बीच तीखी नोकझोंक हर दिन की बात हो गई थी। वहीं, निचली मंजिल पर बैठी सुनीता चुपचाप उन आवाज़ों को सुनते हुए कब  अपने अतीत के गलियारों में खो गई उसे पता ही नहीं चला। सुनीता, घर के छोटे बेटे रमेश की पत्नी, इस घर में जब शादी के बाद आई थी। शुरू में घर में सबकुछ ठीक था, लेकिन बेटियों के जन्म के बाद माहौल बदल गया। पहली बेटी के जन्म पर पूरे घर ने मुस्कान भले ही दिखाई, "कोई नहीं अगली बार भगवान तेरी गोद में लल्ला जरूर डालेगा।"सासू मां ने कहकर पता नहीं उसे समझाया या खुद को।पर दूसरी बेटी के आते ही स्थितियां बदल गई। सासू मां के चेहरे पर गहरी मायूसी छा गई। जबकि जेठानी सरिता ने अपने तीखे तानों से सुनीता का जीना मुश्किल कर दिया था।“बेटियां ही बेटियां! देवर जी का वंश कैसे चलेगा? बेटा होता तो कुछ बात होती,” सरिता हर छोटी-बड़ी बात पर सुनीता को सुनाती रहती।अब तो सास भी अक्सर तानों में कहती, “बेटे का सु...

रिमझीम

  गर्मियों की सुनहरी शाम थी। मेहंदी की महक हवाओं में घुली हुई थी, और घर में शादी की तैयारियाँ पूरे जोर-शोर से चल रही थीं। पूरा घर मेहमानों से भरा पड़ा था । हल्दी की रस्म के लिए पीले रंग के शरारे में  सजी, रिमझिम का रूप  बिल्कुल चांदनी की तरह दमक रहा था।। लेकिन उसकी आँखों में खुशी के साथ-साथ एक जिद भी साफ झलक रही थी।"मेरा कन्यादान बुआ ही करेंगी," रिमझीम ने यह बात पूरे परिवार के सामने ठान ली थी। उसकी यह बात सुनकर  उसके माँ और पिताजी ने एक-दूसरे की ओर देखा, और नजरें। झुका ली,उसकी बुआ रमा ने हल्की मुस्कान के साथ कहा, "लेकिन बेटा, यह परंपरा माता-पिता निभाते हैं। " रिमझिम ने प्यार भरी लेकिन दृढ़ आवाज में जवाब दिया, "मेरे लिए आप ही मेरी माँ हैं। आपने ही मेरे लिए सब कुछ किया है।"थोड़ी देर कमरे में खामोशी छाई रही फिर सभी बाहर जाकर अपने-अपने कामों में लग गए।, कमरे में बैठी रमा, अतीत में खो  गई।जब रिमझीम का जन्म हुआ था, पूरे घर में खुशियाँ छा गई थीं। उसकी माँ, सविता, और दादी उसे गोद में लिए घंटों निहारा करतीं। उसके छोटे-छोटे हाथ और गुलाबी गाल सबका दिल जीत लेते थे।  ज...

घमंड

 आज पूरे 15 दिन हो गए प्रिया और राजेश की शादी को।     प्रिया को अपने घर की बहू बनाकर पूरा वर्मा परिवार काफी खुश था। हो भी क्यों नहीं,  वह एक सुंदर ,पढ़ी लिखी सुलझे विचारों की लड़की थी।  काफी अमीर घर से संबंध रखती थी। उसकी माता-पिता ने बड़ी शानो शौकत के साथ बेटी की शादी की थी। एक से बढ़कर एक कपड़े, गहने और महंगे उपहार दिए थे। राजेश एक सॉफ्टवेयर कंपनी में इंजीनियर था। पिताजी सरकारी शिक्षक से रिटायर थे। छोटी बहन सुरभि बी ए फाइनल की पढ़ाई कर रही थी। भाई रौनक इंजीनियरिंग की तैयारी कर रहा था।एक दिन प्रिया सुबह सुबह नहा धोकर रसोई घर में प्रवेश करती है।"मम्मी जी आज कोई आने वाला है क्या? इतनी सारी तैयारियां!" हां बेटा, तुम्हारे ससुर जी के पुराने दोस्त शर्मा जी आज नाश्ते पर आ रहे हैं वह तुम्हारी शादी में शहर से बाहर थे। तो हमने आज उन्हें नाश्ते पर बुलाया है। इसी बहाने वह तुमसे मिल भी लेंगे।" अच्छा। प्रिया भी नाश्ता बनाने में अपनी सासू मां की मदद करने लगती है। थोड़ी देर बाद पूरा परिवार  नाश्ता कर रहा है। सब खुश और हंसी-मजाक कर रहे हैं। नाश्ते के बाद प्रिया अपने क...