गलती
रागिनी के घर पर शादी का माहौल था,बिटिया की शादी थी। घर मेहमानों से भरा हुआ था। हर तरफ रौनक और चहल-पहल थी। संगीत की धुन, खिलखिलाते चेहरे और मिठाइयों की मिठास ने माहौल को और भी खुशनुमा बना दिया था। लेकिन रागिनी उलझन में नजर आ रही थी।आज उसकी बेटी अपनी नई जिंदगी की शुरुआत करने जा रही थी, लेकिन रागिनी के दिल के एक कोने में एक बात कांटे की तरह चुभ रही थी। उसके सभी रिश्तेदार शादी में पहुंचे थे, लेकिन दुल्हन के मामा अभी तक नहीं आए थे। खासकर शगुन का सामान न लाने की चर्चा ने रागिनी को बेचैन कर दिया था। मेहमानों में फुसफुसाहट शुरू हो गई थी।“मामी जी, मामा जी शगुन लेकर नहीं आए? कुछ हुआ है क्या?” किसी ने पूछ लिया।वह मुस्कुरा कर बात को टाल गई,लेकिन अंदर ही अंदर उसका दिल धड़क रहा था। उसे समझ नहीं आ रहा था कि इस सवाल का क्या जवाब दे। अगर वे लोग नहीं आए तो शादी में मामा की रश्म कौन निभाएगा?क्या इज्ज़त रह जाएगी उसकी सबके सामने?उसने खुद से ही सवाल किया, “क्या मेरी सालों पुरानी गलती का असर आज भी है? क्या वे अब भी मुझसे नाराज हैं?रागिनी अपने परिवार की सबसे बड़ी बेटी थी। उसके दो छोटे भाई थे,विवेक और राघव, जो उससे बेहद प्यार करते थे। पूरे परिवार की लाडली होने के कारण उसे हर चीज में सबसे पहले रखा जाता था। शादी के बाद भी वह अक्सर मायके आती-जाती रहती थी और अपनी जिम्मेदारियां निभाती थी।
कुछ साल पहले, जब उसके छोटे भाई की शादी हुई, तो पूरा परिवार बहुत खुश था। लेकिन शादी के कुछ महीनों बाद उसकी मां बीमार पड़ गईं। रागिनी ने अपनी मां की पूरी देखभाल की। वह दिन-रात उनकी सेवा में लगी रहती। लेकिन उनकी बीमारी बढ़ती गई, और एक दिन उन्होंने दुनिया को अलविदा कह दिया।मां के जाने के बाद घर का माहौल उदास हो गया था। उसी समय, रागिनी ने एक ऐसा काम किया, जिसका असर उसकी जिंदगी पर हमेशा के लिए छा गया।मां की अलमारी में रखे गहनों को देखकर रागिनी के मन में लालच आ गया। उसे लगा कि ये गहने उसकी मां की यादगार हैं, और ये उसके पास ही होने चाहिए। बिना किसी को बताए उसने सारे गहने अपने बैग में रख लिए और चुपचाप अपने ससुराल लौट गई।कुछ दिनों बाद, जब इस बात का भेद खुला, तो उसके पिता को बहुत दुख हुआ। उन्होंने उसे फोन कर के कहा, “रागिनी, तुमने ऐसा क्यों किया? ये गहने तुम्हारे अकेले के नहीं थे। तुम्हारी मां ने ये सब मिल-बांटकर रखने के लिए कहा था। तुमने हमारे भरोसे को तोड़ा है।”उस दिन के बाद से रागिनी के मायके से उसका रिश्ता वैसा नहीं रहा। उसके भाई और पिता ने उससे बात करना कम कर दिया।आना जाना तो मानो बंद ही हो गया।सालों बीत गए, लेकिन वह अपनी गलती के लिए माफी मांगने की हिम्मत नहीं जुटा पाई।आज उसी गलती का डर उसके दिल में बैठा था। क्या उसके भाई और पिता अभी भी नाराज हैं? क्या वे उसकी बेटी की शादी में आकर उसे माफ कर देंगे?
शाम होने वाली थी। बारात आने में बस कुछ ही समय बचा था। रागिनी का दिल तेज़ी से धड़क रहा था। तभी दरवाजे पर शोर हुआ। उसने देखा कि उसका छोटा भाई, राघव,जिसे वह बचपन में खूब लाड़ करती थी, अपने हाथ में शगुन की थाल लिए खड़ा था। उसके साथ बड़ा भाई,पिता और भाभियां भी थे।“दीदी, ये सब ले जाइए। शगुन पूरा है,” छोटे भाई ने कहा। उसकी आंखों में कोई गुस्सा नहीं, बल्कि एक मुस्कान थी। रागिनी की आंखें भर आईं।“भैया... ,पिताजी,..मैं... मुझसे गलती हो गई थी...” रागिनी की आवाज कांप रही थी।पिता ने उसके कंधे पर हाथ रखा और बोले, “गलतियां इंसान से होती हैं, बेटी। पर परिवार में माफी और सुलह का रास्ता हमेशा खुला होता है। हमें तुमसे शिकायत थी, लेकिन तुम्हारे भाई अपनी भांजी की शादी में शामिल न होकर रिश्ते को हमेशा के लिए खत्म नहीं करना चाहते थे। हम इस खुशी के मौके पर पुरानी बातों को भूलकर नए रिश्तों की शुरुआत करना चाहते हैं।”
रागिनी की आंखों से आंसू छलक पड़े। उसने अपने भाइयों को गले लगा लिया। उसके दिल का बोझ जैसे उतर गया।शादी का माहौल अब और भी खुशनुमा हो गया था। रागिनी ने एक नई शुरुआत की उम्मीद के साथ अपनी बेटी को विदा किया। उसने महसूस किया कि माफी और प्यार से हर रिश्ते को दोबारा जोड़ा जा सकता है।उन्हें सुधारना ही रिश्तों की सच्ची खूबसूरती है।
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