नैना एक पढ़ी-लिखी, आत्मनिर्भर बनने का सपना देखने वाली लड़की थी। उसकी चाहत थी कि वह खुद के पैरों पर खड़ी हो, कुछ करे, अपनी पहचान बनाए। लेकिन उसके माता-पिता परंपरागत सोच वाले थे। वे एक ग्रामीण लेकिन अच्छे और प्रतिष्ठित परिवार से थे, और जब नैना के लिए एक धनी शहर में रहने वाले परिवार से रिश्ता आया, तो उन्होंने बिना उसकी सहमति के शादी तय कर दी।नैना के ससुराल वाले बहुत अमीर थे, लेकिन उनका घमंड उनकी दौलत से भी बड़ा था। शादी के बाद, नैना को जल्दी ही एहसास हो गया कि उसका पति आयुष शराब का आदी है और छोटी-छोटी बातों पर गुस्सा करता है। पहले तो उसने सोचा कि समय के साथ सब ठीक हो जाएगा, लेकिन जब पहली बार आयुष ने उस पर हाथ उठाया, तो उसका दिल टूट गया।उसने अपने माता-पिता को इस बारे में बताने की कोशिश की, लेकिन फिर उसने सोचा कि वह यह सब जानकर बहुत दुखी हो जाएंगे ।वह चुप रही  यह सोचकर कि शायद हालात बदलेंगे। लेकिन समय के साथ चीजें और बिगड़ती गईं।एक दिन नैना की मां उसके पिताजी से कहती है कि"6 महीने होने को आए बिटिया की शादी को। जब भी उसे बुलाने को कहो तो ससुराल वाले कोई न कोई बहाना बना देते हैं। वह फोन पर भी ज्यादा बातें नहीं करती ।जाने क्यों मेरा जी घबरा रहा है क्यों न हम चलकर खुद ही बेटी से मिल आएं। "हां उसे देखने का तो मेरा भी बड़ा मन कर रहा है। तुम बिटिया के पास चलने  की तैयारी करो।हम दो दिनों के बाद उसके पास चलते हैं।"

दो दिनों बाद, नैना के माता-पिता उससे मिलने उसके ससुराल पहुंचे। वे अपनी बेटी के लिए कपड़े, मिठाइयाँ और फल लेकर आए। नैना की सास उनलोगों को देखकर"अरे आप लोग अचानक, कोई खबर भी नहीं की। और यह सब क्या ले आए हैं आप लोग?ऐसे कपड़े और मिठाइयाँ तो हमारे नौकर भी नहीं लेते!"नैना के माता-पिता यह सुनकर असहज हो गए, लेकिन कह भी क्या सकते थे, बेटी की ससुराल जो थी पर असली सदमा तो उन्हें तब  लगा जब उन्होंने अपनी बेटी को देखा। नैना के चेहरे पर उदासी और हाथों पर चोट के निशान थे। उसकी आँखें अंदर से बुझ चुकी थीं। बहुत पूछने पर उसने धीरे-धीरे बताया कि आयुष उसे मारता-पीटता है।यह सुनकर नैना के पिता का खून खौल उठा। "क्या हाल कर दिया है, आप लोगों ने मेरी बेटी का?आप लोग केवल नाम नाम के ही  बड़े खानदान वाले हैं।"नैना  की सास ने बात को बदलने की कोशिश की"अरे क्या हुआ है आपकी बेटी को? अच्छी भली तो है। उसके कपड़े गहने तो देखिए और यह चोट तो इसे सीढ़ियों पर से गिर जाने के कारण लगी है।"लेकिन इस बार नैना भी चुप नहीं रही। उसने पहली बार अपनी आवाज़ बुलंद की "नहीं यह चोट मुझे आपके बेटे ने दी है और आप अच्छी तरह से यह सब जानती हैं। मैंने कितनी बार आपसे शिकायत की लेकिन आप बेटे को टोकने की जगह मुझे ही समझौता करने की सलाह देती आई है। लेकिन अब मैं और नहीं सहूंगी।"नैना ने उसी दिन अपने ससुराल को हमेशा के लिए छोड़ दिया। अपने पति के खिलाफ पुलिस में शिकायत दर्ज करवाई।कुछ समय बाद, उसने तलाक लिया और फिर से पढ़ाई शुरू की। धीरे-धीरे उसने अपने सपनों को फिर से संजोया और खुद को आत्मनिर्भर बनाया। आज नैना एक बैंक  मैनेजर बन चुकी है।आज नैना न सिर्फ अपने पैरों पर खड़ी है, बल्कि वह उन लड़कियों के लिए प्रेरणा बन चुकी है, जो अपने हक के लिए लड़ना सीख रही हैं। उसने साबित कर दिया कि आत्मसम्मान और सपनों से बढ़कर कुछ नहीं। लेकिन हर बेटी के माता पिता को भी यह समझना होगा कि "बेटियाँ केवल पराया धन नहीं होतीं, वे भी अपने भाग्य की लेखिका होती हैं।"



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