घमंड
आज पूरे 15 दिन हो गए प्रिया और राजेश की शादी को। प्रिया को अपने घर की बहू बनाकर पूरा वर्मा परिवार काफी खुश था। हो भी क्यों नहीं, वह एक सुंदर ,पढ़ी लिखी सुलझे विचारों की लड़की थी। काफी अमीर घर से संबंध रखती थी। उसकी माता-पिता ने बड़ी शानो शौकत के साथ बेटी की शादी की थी। एक से बढ़कर एक कपड़े, गहने और महंगे उपहार दिए थे। राजेश एक सॉफ्टवेयर कंपनी में इंजीनियर था। पिताजी सरकारी शिक्षक से रिटायर थे। छोटी बहन सुरभि बी ए फाइनल की पढ़ाई कर रही थी। भाई रौनक इंजीनियरिंग की तैयारी कर रहा था।एक दिन प्रिया सुबह सुबह नहा धोकर रसोई घर में प्रवेश करती है।"मम्मी जी आज कोई आने वाला है क्या? इतनी सारी तैयारियां!" हां बेटा, तुम्हारे ससुर जी के पुराने दोस्त शर्मा जी आज नाश्ते पर आ रहे हैं वह तुम्हारी शादी में शहर से बाहर थे। तो हमने आज उन्हें नाश्ते पर बुलाया है। इसी बहाने वह तुमसे मिल भी लेंगे।" अच्छा। प्रिया भी नाश्ता बनाने में अपनी सासू मां की मदद करने लगती है।
थोड़ी देर बाद पूरा परिवार नाश्ता कर रहा है। सब खुश और हंसी-मजाक कर रहे हैं। नाश्ते के बाद प्रिया अपने कमरे में चली जाती है।"और बताओ कैसी लगी हमारी बहू?" शर्मा जी:बहु तो बहुत प्यारी है, लेकिन यार,(संकोच करते हुए) , एक बात बतानी थी। सुना है कि प्रिया की मां, सुलोचना जी, बड़ी घमंडी औरत हैं। उन्हें अपने धन दौलत का बड़ा घमंड है ।अपने बड़े दामाद को भी घर जमाई बना कर रखती हैं।राजेश की मां: (हैरान होकर) क्या? ये कैसी बातें कर रहे हैं भाई साहब?
शर्मा जी: (गंभीर स्वर में) भाभी, ये सही बात है। अब देखना, वो राजेश और प्रिया को भी आप सबसे दूर करने की कोशिश करेंगी।कुछ दिनों बाद प्रिया की मां सुलोचना जी बेटी दामाद को खाने पर बुलाती हैं।"राजेश बेटा, मैं सोच रही थी कि की नौकरी में क्या रखा है? क्यों ना तुम भी कोई बिजनेस स्टार्ट करो जैसे मेरे बड़े दामाद जी कर रहे हैं। पहले यह भी तुम्हारी तरह नौकरी करते थे। लेकिन आज देखो क्या नहीं है इनके पास? हां पैसों की चिंता मत करना जितने भी पैसे लगने होंगे हम लगा देंगे।"नहीं मम्मी जी मैं अपनी नौकरी में संतुष्ट हूं।""राजेश बेटा, प्रिया की खुशियों का भी तो सोचो। उसे बहुत ही ऐशो आराम से पाला है, मैंने।"अरे जब दामाद जी कह रहे हैं कि उन्हें बिजनेस नहीं करना तुम दबाव क्यों डाल रही हो?"प्रिया के पिताजी के बीच में बोलने से सुलोचना जी चुप तो हो गई, लेकिन उन्होंने अपने पति को खा जाने वाली नजरों से घुर कर देखा। सुलोचना जी के पति दीनदयाल जी एक सभ्य इंसान थे। वह अपनी पत्नी को कई बार समझाया करते की बेटियों की गृहस्थी में इतनी दखल अंदाजी ना किया लेकिन सुलोचना जी उनकी एक ना सुनती। इसी प्रकार उन्होंने बड़ी बेटी और दामाद को उनके परिवार से अलग कर दिया था।
कुछ दिनों बाद राजेश अपने छोटे भाई रौनक का शहर के सबसे बड़े कोचिंग सेंटर में दाखिला करवाता है जिससे वह किसी अच्छे कॉलेज में जगह पा सके। बातों ही बातों में प्रिया यह बात फोन पर अपनी मां को बताती है। जिसे सुनते ही सुलोचना देवी का दिमाग गर्म हो जाता है।"अरे बेटा इतना खुश क्या हो रही है? यह दामाद जी अपनी सारी कमाई अपने भाई-बहनों पर ही लुटा देंगे तो तेरे लिए क्या बचेगा?"तुम भी ना मां जाने क्या बातें लेकर बैठ जाती हो? चलो मैं तुम्हें बाद में कॉल करूंगी अभी मुझे खाना बनाना है"यह कह कर प्रिया फोन रख देती है। लेकिन सुलोचना जी को यह बात हजम नहीं हो रही थी उन्होंने फौरन गुस्से में राजेश को फोन लगाया और उसे भी यही सब बातें कहने लगी। "अरे दामाद जी कल को आपके भी बाल बच्चे होंगे। परिवार बढ़ेगा, सारे पैसे अपने परिवार वालों पर लुटा दोगे तो मेरी बच्ची का क्या होगा? क्या जरूरत थी अपने भाई का एडमिशन इतने महंगे कोचिंग सेंटर में करवाने की?" यह सुनते ही राजेश को भी गुस्साआ जाता है और वह कहता है कि की" मम्मी जी बेहतर होगा कि आप मेरे पारिवारिक मामलों में दखल न दें। और मैं आपके बड़े दामाद की तरह अपने परिवार को छोड़कर आपके घर आने वाला नहीं हूं। तो आप इन सब से दूर ही रहें।"इतना कह कर वह फोन रख देता है। सुलोचना क्रोध से तिलमिलाते हुए सीधे बेटी की ससुराल पहुंच जाती है। वहां जाकर वह प्रिया से कहती हैं कि राजेश ने मेरा अपमान किया है। अब मैं तुम्हें इस घर में 1 मिनट नहीं रहने दूंगी। प्रिया को भी अपनी मां के अपमान की बात सुनकर गुस्सा आ जाता है। और परिवार वालों के लाख समझाने समझाने के बाद भी वह अपनी मां के साथ यह कहकर चली जाती है कि जब तक राजेश उसकी मां से माफी नहीं मांग लेता वह वापस नहीं आएगी। राजेश ऑफिस से वापस आता है तो उसे पता चलता है कि प्रिया घर छोड़कर चली गई है।"जा बेटा प्रिया की मां से माफी मांग ले और बहू को घर वापस ले आ।"नहीं मां, पिताजी, आप लोग नहीं जानते कि प्रिया की मां हमारा घर तोड़ना चाहती हैं मैं हरगिज उनके घर नहीं जाऊंगा और न उनसे माफी का तो सवाल ही नहीं उठता।"इसी तरह दो महीने बीत जाते हैं।न तो राजेश उसे लाने जाता है और न ही प्रिया वापस लौट कर आती है।लेकिन प्रिया को राजेश की याद बहुत आती थी।राजेश भी उसे प्रेम करता था लेकिन उसका स्वाभिमान आड़े आ रहा था।इधर सुलोचना जी को भी अहसास हो रहा था कि राजेश को झुकाना उनके लिए संभव नहीं है। एक दिन "प्रिया इन कागजों पर दस्तख़त कर दे।"ये कैसे कागज हैं मम्मी?"ये तलाक के पेपर हैं।"क्या?"प्रिया सुनते ही जोर से चीखी।"हां बेटा,मै उन भूखे नंगे लोगों ने तुम्हे छुटकारा दिलाकर किसी अमीर घराने में तेरी शादी करवा दूंगी।"हरगिज नहीं मम्मी, मैंने तुम्हारी बात मान कर गलती की जो अपना पति और घर छोड़कर यहां आ गई।"कहकर रोती हुई वह अपने कमरे में चली गई। इधर सुलोचना देवी बेटी के इस अप्रत्याशित व्यवहार से सकपका गई। प्रिया के पिता जी उसके कमरे में जाते हैं और उससे कहते हैं "बेटी तुम्हारी मां अपने अहंकार में तुम्हारी गृहस्थी को उजाड़ देगी।मेरी बात मानो और तुम अपनी भूल सुधारते हुए अपने घर वापस चली जाओ। तुम्हारी ससुराल वाले भले लोग हैं।तुम कहो तो मैं दामाद जी से बात करता हूं।"नहीं पापा, आपको उनसे बात करने की जरूरत नहीं ।गलती मैंने की है तो उसे सुधारने का काम भी मुझे ही करना होगा।"यह कहकर प्रिया ने तुरंत अपना बैग पैक किया और अपने ससुराल की ओर चल पड़ी। सुलोचना देवी ने उसे रोकने का बहुत प्रयास किया। लेकिन अब प्रिया रुकने वाली नहीं थी । वह अपने पति और परिवार के पास चली गई। सुलोचना देवी का अपने घमंड और अहंकार टूट चुका था। बेटी का ससुराल तोड़ने के चक्कर में आज उनकी अपनी बेटी ही उनसे दूर हो चुकी थी।
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