निकम्मा
"देखिए बाबूजी, अब हमारा एक साथ रहना मुश्किल लगता है। अरे दो कमाएं और तीसरा बैठ खाएं, यह कहां का न्याय है? मैं तो यही कहूंगी कि आप बंटवारा कर दें । शायद छोटे देवर जी के माथे पर जिम्मेदारियां आए तो सही राह भी पकड़ लें।" "बड़ी दीदी ठीक ही कहती है, हम दोनों के पति पूरा दिन दुकान में जी तोड़ मेहनत करते हैं और एक देवर जी हैं जिन्हें अपनी दोस्तो और अय्याशियों से ही फुर्सत नहीं। अरे भला हम कब तक इन सब का भार उठाएंगे?"इस तरह छोटी बहू ने भी बड़ी बहू की बातों का समर्थन किया। दोनों के पति भी सर झुकाकर चुपचाप खड़े हो अपनी पत्नियों की बातों का मूक समर्थन कर रहे थे।" ठीक है,मैं देखता हूं "कहकर सेठ गिरधारी लाल ने यह पारिवारिक बैठक बर्खास्त की। गिरधारी लाल जी के परिवार में उनके तीन बेटे, बहुएं और उनके बच्चे थे। जमा जमाया पारिवारिक व्यवसाय था, जिसे उनके बड़े और मंझले बेटे आगे बढ़ा रहे थे। समस्या के मूल में था उनका छोटा बेटा रतन। एक नंबर का निकम्मा और अय्याश। अच्छे-अच्छे कपड़े पहनना, अच्छा खाना और दोस्तों के साथ सारा दिन आवारागर्दी करना यही उसका व्यवहार था। ...