रिश्ता

जानकी निवास में जानकी जी अपने दो बेटों और बहुओं के साथ रहती थी ।सुमन बड़ी बहू थी और राधिका छोटी बहू।   दोनों आपस में बहुत प्यार और सम्मान के साथ रहती थीं।सुमन स्वभाव से शांत, समझदार और धैर्यवान थी। उसने पुरे घर  को बहुत अच्छे से संभाला हुआ था।क्योंकि वह जेठानी थी और घर की बड़ी बहू के रूप में सभी उस पर भरोसा करते थे। वह हर काम को ध्यानपूर्वक और पूरी मेहनत से करती थी। वहीं, राधिका छोटी थी और चुलबुली, ऊपर से उसकी जॉब।  वैसे तो वह  सुमन की मदद करती थी लेकिन जब भी सुमन उसे कोई नया काम सिखाने  की कोशिश करती।"दीदी, मैं आपके जैसा कहां कर पाऊंगी? मैं तो बस आपकी मदद ही कर दूंगी आप ही कर लो।"। इस तरह वह कोई भी जिम्मेदारी लेने से दूर भागती। सुमन इस बात से परेशान हो जाया करती।


एक दिन जानकी जी के पास उनकी बेटी नेहा का फोन आता है। जो कि अपने पति के साथ मुंबई में रहती थी।"मां मेरे ससुर जी  के किसी  रिश्तेदार की बेटी की शादी है। वे लोग हमारे शहर में ही रहते हैं। मैं तो नहीं आ पाऊंगी लेकिन मेरे सास, ससुर, जेठ, जेठानी और नंद सभी लोग शादी को अटेंड करेंगे। अगले सप्ताह ही शादी है। वे लोग हमारे घर पर ही रुकेंगे और शाम को शादी अटेंड करके अगले दिन वापस चले जायेंगे।"जानकी जी दोनों बहुओं को बता देती हैं की बेटी के ससुराल वाले आ रहे हैं। 

सुमन और रधिका अपनी ननद के ससुराल वालों की स्वागत की तैयारी में लग जाती हैं। सुमन सूखे नाश्ते और  मिठाइयां तैयार करने में लग जाती है ।जबकि राधिका घर की साफ सफाई और मेहमानों के लिए कमरा तैयार करवाने में लग जाती है।

 लेकिन जिस दिन मेहमान आने वाले उसी दिन,सुमन अचानक बीमार पड़ गई और उठने की हालत में नहीं थी। पूरा घर परेशान हो गया। जानकी जी के तो हाथ पांव ही फूलने लगे,क्योंकि सुमन के बिना रसोई का काम कैसे पूरा होगा? राधिका ने तुरंत सुमन के पास जाकर कहा, "दीदी, आप चिंता मत करो, आज मैं सब संभाल लूँगी। आपने मुझे जितना सिखाया है, मैं आपके भरोसे को कभी टूटने नहीं दूँगी।"


आज राधिका ने पूरे दिल से रसोई संभाली, हालांकि मेहमान पांच छह लोग थे ,अपना परिवार भी था। तो कुछ चीजें उसने आर्डर करके भी मंगवाई ।मेहमानों का स्वागत किया और रिश्तेदारों को शिकायत का कोई मौका नहीं दिया सभी लोग राधिका की तारीफ कर रहे थे। जब सुमन ने यह सब देखा, तो उसकी आँखों में आँसू आ गए। वह समझ गई कि राधिका ने न सिर्फ उसकी मदद की, बल्कि अपने कर्तव्यों को निभाना भी बखूबी सीख रही है । उस दिन के बाद से सुमन और राधिका का रिश्ता और भी मजबूत और प्यार भरा हो गया।

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