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अप्रैल, 2025 की पोस्ट दिखाई जा रही हैं

अपनापन

निया एक  चंचल स्वभाव की लड़की थी। शहर की तेज़ रफ्तार ज़िंदगी में वह अपने पापा के साथ अकेली एक फ्लैट में रहती थी। उसकी मां को गुज़रे कई साल हो चुके थे। उसका कोई भाई बहन भी नहीं था। हर शाम निया अपने ऑफिस से लौटकर पास के एक छोटे से पार्क में टहलने जाती थी। वो कुछ वक्त खुद के साथ बिताना चाहती थी — प्रकृति की गोद में, हलकी हवा में, और कभी-कभी किताबों के साथ।एक दिन, जब सूरज ढलने को था और आसमान हलके नारंगी रंग में रंग चुका था, निया पार्क में टहल रही थी। तभी उसने देखा कि एक बुजुर्ग व्यक्ति,  जिन्हें वह प्रतिदिन उस  पार्क में टहलते हुए देखतो थी।अचानक ठोकर लगने से गिर पड़े। निया तुरंत दौड़कर उनके पास पहुँची और उन्हें सहारा देकर उठाया।"अंकल जी, आपको कहीं चोट तो नहीं लगी?" उसने चिंता भरे स्वर में पूछा। बुजुर्ग ने मुस्कराकर कहा, "नहीं बेटा, मैं ठीक हूं। बस थोड़ी सी ठोकर लग गई थी। कुछ उम्र का  भी असर है बस, अब ये टांगें भी कब साथ छोड़ दें, क्या पता।"निया ने उनका हाथ थामा और पास की बेंच पर बैठा दिया। उनका नाम वर्मा जी था — विनोद वर्मा। बातचीत के दौरान उन्होंने एक भारी सांस लेते हु...

असली दौलत

अजय आज कुछ देर से ऑफिस से लौटा। शनिवार का दिन था दोस्तों के साथ पार्टी करने का प्लान बन गया था, तो ऑफिस से आते-आते देर हो गई। जैसे ही वह दरवाजा खोलने लगा, देखा दरवाजे के पास एक चिट्ठी पड़ी हुई है। आज के समय में भला चिट्टियां कौन लिखता है? पत्र उठा कर  घर के अंदर आया और बैग एक तरफ रखकर चिट्ठी खोलकर देखी , उसकी मां का पत्र था। बेटा ,हम सब यहां ठीक हैं। खेत वही हैं, पीपल वही है, बस तू अब कम दिखाई देता है। याद है तुझे वो लकड़ी का झूला जो तूने खुद लगाया था? आज भी राजू वहीं झूलता है। हम तुझसे ज्यादा कुछ नहीं चाहते, बस कभी-कभी तेरा चेहरा देख लें, इतना ही बहुत है। तुम्हारी मां !अजय ने जब ये चिट्ठी पढ़ी, तो उसकी आँखों में आँसू आ गए। उसे एहसास हुआ कि उसने सफलता के लिए भागते समय अपने अपनों को पीछे छोड़ दिया है। उसकी मां अतीत में खो जाता है। छोटे से गाँव बड़ौली में एक बड़ा सा पीपल का पेड़ था, जिसके नीचे बैठकर बुज़ुर्ग अपनी कहानियाँ सुनाया करते थे। इसी गाँव में रहता था एक परिवार—दीनानाथ, उनकी पत्नी गीता, और उनके तीन बच्चे: अजय, नीना और छोटा राजू।दीनानाथ किसान थे, मेहनती और ईमानदार। खेतों से जो ...
नेहा और आर्यन एक ही कंपनी में काम करते थे। दोनों के स्वभाव में सादगी और समझदारी थी। काम के सिलसिले में मुलाक़ातें हुईं, दोस्ती गहरी हुई और धीरे-धीरे दोनों ने एक-दूसरे को पसंद करना शुरू कर दिया। नेहा एक मध्यम वर्गीय परिवार से थी जबकि आर्यन का परिवार शहर के जाने-माने रईसों में गिना जाता था।जब आर्यन ने अपने परिवार में नेहा के बारे में बताया, घर में हलचल मच गई। खासकर उसकी मां, किरण देवी, नेहा के साधारण परिवार से काफी नाखुश थीं। लेकिन बेटे की जिद के आगे उन्हें झुकना ही पड़ा सगाई के दिन भी किरण देवी और उनकी बेटी, पूजा, रिश्तेदारों के बीच दबी ज़ुबान में नेहा के परिवार की हैसियत का मज़ाक बनाती रहीं।"देखो तो कैसा इंतजाम किया है सगाई का! अपनी नहीं, तो कम से कम हमारी हैसियत का तो ख्याल रख लेते। अगर उनकी बस की नहीं थी तो हमें बता देते ।"  नेहा के माता-पिता चुपचाप सब सुनते रहे,  नेहा ने भी सबकुछ मुस्कुराकर सहन किया, क्योंकि उसे अपने आत्मसम्मान और प्यार पर भरोसा था। शादी के बाद भी किरण देवी का व्यवहार नहीं बदला। कभी नेहा की साड़ी को सस्ता बताना, कभी उसके गहनों की तुलना अपनी बेटी के गहनों स...

गृह प्रवेश

 कहानी: एक साल बाद शर्मा परिवार एक संयुक्त परिवार था। घर में माता-पिता के साथ दो बेटे—राहुल और रोहित—और तीन बेटियां थीं। बड़े बेटे राहुल की शादी कुछ साल पहले पूजा से हुई थी। पूजा एक सुलझी हुई, समझदार और संस्कारी बहू थी, लेकिन दुर्भाग्य से उसे वह सम्मान कभी नहीं मिला जिसकी वह हकदार थी।घर के छोटे-मोटे मामलों में उसे अक्सर नीचा दिखाया जाता। किसी भी बात पर उसे जिम्मेदार ठहराया जाता, सास और न नंदे मिलकर उसका जीना मुश्किल कर देती थीं ।दुख की बात यह थी कि उसका पति राहुल भी कभी उसका साथ नहीं देता। पूजा चुपचाप सहती रही, यह सोचकर कि वक्त बदलेगा, लेकिन हालात और बिगड़ते चले गए।एक दिन, हद हो गई। एक दिन वह अपने 3 साल के बेटे पर किसी बात को लेकर नाराज हो रही थी जिसे देखकर उसकी छोटी ननद ने टोक दिया।"क्या है भाभी,इतने छोटे से बच्चे को क्यों डांट रही हो? या ऐसा कहो कि हमारा गुस्सा तुम उसके ऊपर उतार रही हो।"पूजा को भी गुस्सा आ गया और उसने कह दिया कि क्या मैं अपने बच्चे को भी डांट नहीं सकती "बात छोटी सी थी पर इस बात पर पूरे घर में कलेश मच गया । शाम को जब राहुल ऑफिस से लौटा तो मां और बहनों न...
"मॉम,मै आरव के घर जा रहा हूं।आज संडे को उसकी मॉम घर पर होती हैं।आंटी ने कहा है कि वो हमारा स्कूल का एनवायरमेंटल साइंस का प्रोजेक्ट बनवा देंगी। मैं और आरव  साथ में यह प्रोजेक्ट कर रहे हैं।"सुबह-सुबह अपने स्कूल बैग में प्रोजेक्ट  का सामान भरते हुए मेरे 8 साल के बेटे गर्व ने कहा।" लेकिन बेटा,तुमने मुझे इस बारे में क्यों नहीं बताया? मैं प्रोजेक्ट बनवा  देती।"गर्व मेरी बात सुनकर हंसता हुआ कहता है कि"मॉम आप नहीं करवा पाओगे। आंटी बहुत स्मार्ट है बहुत बड़े ऑफिस में काम करती हैं। अगर वह हमारा प्रोजेक्ट करवा रही हैं तो हम जरूर फर्स्ट आएंगे।"कहता हुआ वह अपना सामान उठाकर चला गया। लेकिन सुमन को यह बात धक से लग गई।तो क्या अब क्या मैं अपने बच्चे की नजर में भी...?असल में सुमन एक होनहार महिला थी। पढ़ाई में अव्वल,  और एक प्रतिष्ठित कंपनी में अच्छे पद पर कार्यरत। जब उसकी शादी अमित से हुई, तो उसके जीवन में एक नया मोड़ आया। दोनों ने अपने भविष्य के सुनहरे सपने बुने। लेकिन शादी के कुछ सालों बाद, जब उनके दो बच्चे हुए, तो सुमन ने एक कठिन निर्णय लिया—उसने अपनी नौकरी छोड़ दी।सुमन के...