गृह प्रवेश

 कहानी: एक साल बाद


शर्मा परिवार एक संयुक्त परिवार था। घर में माता-पिता के साथ दो बेटे—राहुल और रोहित—और तीन बेटियां थीं। बड़े बेटे राहुल की शादी कुछ साल पहले पूजा से हुई थी। पूजा एक सुलझी हुई, समझदार और संस्कारी बहू थी, लेकिन दुर्भाग्य से उसे वह सम्मान कभी नहीं मिला जिसकी वह हकदार थी।घर के छोटे-मोटे मामलों में उसे अक्सर नीचा दिखाया जाता। किसी भी बात पर उसे जिम्मेदार ठहराया जाता, सास और न नंदे मिलकर उसका जीना मुश्किल कर देती थीं ।दुख की बात यह थी कि उसका पति राहुल भी कभी उसका साथ नहीं देता। पूजा चुपचाप सहती रही, यह सोचकर कि वक्त बदलेगा, लेकिन हालात और बिगड़ते चले गए।एक दिन, हद हो गई। एक दिन वह अपने 3 साल के बेटे पर किसी बात को लेकर नाराज हो रही थी जिसे देखकर उसकी छोटी ननद ने टोक दिया।"क्या है भाभी,इतने छोटे से बच्चे को क्यों डांट रही हो? या ऐसा कहो कि हमारा गुस्सा तुम उसके ऊपर उतार रही हो।"पूजा को भी गुस्सा आ गया और उसने कह दिया कि क्या मैं अपने बच्चे को भी डांट नहीं सकती "बात छोटी सी थी पर इस बात पर पूरे घर में कलेश मच गया । शाम को जब राहुल ऑफिस से लौटा तो मां और बहनों ने बात को नमक मिर्च लगाकर उसके सामने परोस दिया। उसने भी बिना कुछ सोचे-समझे पूजा की बात सुनने  की जगह उस पर हाथ उठा दिया। इस घटना से आज पूजा का दिल टूट गया। वह अपने छोटे बच्चे को लेकर मायके चली गई। राहुल गुस्से और अहंकार में एक बार भी उसे मनाने नहीं गया।समय बीतता गया। दो साल हो गया। पूजा अपने मायके में रह रही थी और वहीं से अपने बच्चे को पाल रही थी।उधर, घर में बदलाव हो रहे थे। घर के छोटे बेटे रोहित की नौकरी लग गई थी, वह दूसरे शहर में शिफ्ट हो गया था।कुछ दिनों बाद उसकी शादी भी करवा दी गई। इसमें भी एक बार किसी पूजा को बुलाना जरूरी नहीं समझा।माता-पिता ने अपनी जमा पूंजी से उसके लिए एक बड़ा घर भी खरीद दिया। राहुल को इस बारे में कोई भनक तक नहीं लगी और वह अपने पैसे घर परिवार पर खर्च करता जा रहा था। जब एक दिन एक दूर के रिश्तेदार से उसे यह बात पता चली, तो वह चौंक गया। जब उसने अपनी मां से इस बारे में पूछा तो पहले तो उन्होंने साफ साफ नकार दिया। लेकिन राहुल के बार बार पूछने पर उन्होंने नाराज होकर कहा"हां खरीदा है हमने उसके लिए घर, अरे वह छोटा भाई है तेरा, ऐसे भी तेरी पत्नी तो नाराज होकर घर छोड़ कर चली गई तो तेरा घर तो बसने से रहा तो अब हम अपने छोटे बहू बेटे बहू के बारे में क्यों ना सोचे?"राहुल को माता-पिता से ऐसे व्यवहार की उम्मीद नहीं थी उसने तो सदैव ही घर परिवार को प्राथमिकता दी थी।लेकिन आज उसे बहुत दुख हुआ।उसने पहली बार पीछे मुड़कर सोचा। पूजा की कही बातें, उसका व्यवहार, उसकी तकलीफें... सब कुछ जैसे एकदम साफ हो गया। उसे समझ में आया कि पूजा गलत नहीं थी। उसके अपने माता-पिता ने भी पक्षपात किया, और उसने—एक पति होकर—अपनी पत्नी का साथ नहीं दिया।उसी दिन राहुल ने फैसला किया। वह पूजा को लेने मायके गया। दरवाजे पर पूजा उसे देखकर हैरान रह गई। राहुल की आंखों में पश्चाताप था,  उसने पूजा से माफी मांगी और कहा,

"मैं बहुत देर कर चुका हूँ, लेकिन अगर तुम तैयार हो तो मैं फिर से एक अच्छा पति बनने की कोशिश करना चाहता हूँ।"

पूजा ने अपने आंसुओं को छिपाते हुए सिर झुका दिया। शायद दिल में अब भी कुछ कोना बचा था उसके लिए।

पूजा अपने बच्चे के साथ एक लंबे इंतजार के बाद फिर से घर लौटी  लेकिन इस  बार पति पर विश्वास के भरोसे, उसके प्रेम और सम्मान के साथ पूजा ने आज  एक नया गृहप्रवेश किया था। ससुराल वाले भी समझ चुके थे कि हवाओं का रुख अब बदल चुका है। इसके बाद ससुराल में भी किसी ने भी पूजा को परेशान नहीं किया।

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