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गहने

 ले बहू तेरे ससुर जी ने तेरे लिए कानों की  झुमकियां बनवाई है इन्हें संभाल कर रख ले। झुमकियां ! सासू मां सरस्वती देवी अपनी बहू मीनाक्षी को झुमकियां देकर चली गई।मीनाक्षी इन झुमकियों को देखकर आश्चर्य में पड़ गई। बात आश्चर्य की थी भी बेटी की शादी में  हजारों खर्चे होते है।ऐसे में घर की बहु को गहने कौन देता है?  दरअसल मीनाक्षी के पति कानपुर में नौकरी करते थे और वह अपने पति और बच्चों के  साथ वहां रहती थी। वह अपनी छोटी ननद रीना  की शादी में गांव आई है। यहां उसके ससुर जी और उनके छोटे भाई का संयुक्त परिवार रहता था। आज रीना की हल्दी की रस्म थी। अभी वह अपने विचारों में डूबी हुई ही थी की उसकी देवरानी कामिनी जो की उसके छोटे ससुरजी की बहु थी, उसके कमरे में आई । अरे दीदी जल्दी तैयार हो जाओ। हल्दी की रसम थोड़ी  देर में शुरू ही होने वाली है। तभी मीनाक्षी की नजर कामिनी के कानों पर पड़ती है। कामिनी ने भी बिलकुल वैसी ही झुमकियां पहन रखी थी। अरे कामिनी क्या तेरे लिए भी  झुमकियां .. हां दीदी बड़े बाबूजी ने आपके सोने के हार  को गलवाकर एक जैसी ही तीन झुमकियां बनवाई ...

परंपरा

 "शांति देवी एक मध्यमवर्गीय परिवार की महिला थीं। उनका एक बेटा, राजेश, और बेटी, नीरा, थी। कुछ दिनों पहले, राजेश की शादी संगीता से हुई थी। वह एक पारंपरिक विचारों वाली महिला थी जबकि उनकी बहू संगीता मॉडर्न अप्रोच के साथ-साथ एक सुलझी हुई लड़की थी। संगीता की शादी को6 महीने होने को आए थे। संगीता अपनी सास के कहे अनुसार घर में साड़ियां ही पहनती थी। क्योंकि यही उनके घर की परंपरा थी।  साड़ी पहनकर काम करने में उसे परेशानी का अनुभव तो होता था। लेकिन अब तेज गर्मी पड़नी शुरू हो गई थी। ऐसे में साड़ी पहन कर किचन में काम करना काफी मुश्किल हो रहा था। बस एक दिन..  संगीता ने सुबह-सुबह साड़ी की जगह सलवार-कुर्ता पहन लिया। शांति देवी ने देखते ही अपनी चश्मा उठाया और माथे पर बल डालते हुए बोलीं, "आजकल की बहुएं तो समझती ही नहीं।  बहुओं ने साड़ी पहनी हो, तो घर में रौनक लगती है। ये सलवार-कुर्ता मायके वालों के घर में पहनने के लिए होते है संगीता ने यह सुना, लेकिन मुस्कुराते हुए बोली, "माँजी, आज गर्मी बहुत ज्यादा है । तो सलवार कुर्ता थोड़ा आरामदायक है इसमें मैं घर का काम भी जल्दी निपटा लूंगी और आराम...

सपना

अंजलि किचन में रात के खाने की तैयारी में जुटी हुई थी। लगता है, तभी दरवाजे पर दस्तक होती है।आरव ट्यूशन से आ गया। सोचते हुए वह दरवाजे की ओर बढ़ी। आ गया बेटा तू ,कहकर वो वापस किचन में चली जाती है।थोड़ी देर बाद आरव किचन में आता है और प्यार से अपनी मां को पकड़कर कहता है कि मां आज खाने में क्या बना रही हो?चपाती,कढ़ाई पनीर,मटर पुलाव और रायता। वाउ,आज तो जी भर कर खाना खाऊंगा। मां उसकी बात सुनकर मुस्कुरा देती है। थोड़ी देर बाद खाने के टेबल परआरव के पापा उससे पूछते हैं कि,आरव तुम्हारी पढ़ाई कैसी चल रही है?अच्छी चल रही है,पापा। गुड, मैं सोच रहा था कि मेडिकल एंट्रेस की तैयारी के लिए एक और कोचिंग सेंटर में तुम्हारा एडमिशन करवा दिया जाए।वर्मा जी ने अपने बेटे मयंक का एडमिशन वहां करवाया है।कह रहे थे कि पिछले साल वहां का रिजल्ट काफी अच्छा रहा था। लेकिन पापा,मैने आपसे पिछली बार भी कहा था कि मैं नीट की परीक्षा में शामिल नहीं होना चाहता हूं। मैं फैशन डिजाइनिंग करना चाहता हूं।तुम्हारे दिमाग से अभी तक यह फितूर नहीं उतरा ।यह फालतू का दिमाग लगाना छोड़ो। ऐंड कंसंट्रेट ऑन योर नीट एग्जामिनेशन।पापा ने अपनी आवाज को...

विदाई

देखो बहन ₹700 से एक पैसे कम नहीं करूंगा। आस पड़ोस की मोहल्ले में पूछ लो यह साड़ी 900 से कम में किसी को नहीं दी है मैंने। अरे काका यह लाल गोटे गोटे वाली साड़ी तो दिखाना।  बिटिया यह साड़ी काफी ऊंचे दाम की है। तेरी मां से ना खरीदी जाएगी।अरे काहे नहीं खरीदी जाएगी यह साड़ी,जब हमारी बिटिया को पसंद है। अंगोछे में अपने गीले हाथो को पोंछते हुए घर से बाहर निकल कर रामदीन बोला।अरे बाबूजी आपने खाना खा लिया। हां बिटिया। मैं वापस से  अपने जमीन पर जा रहा हूं।अरे भाग्यवान ,जल्दी से जो साड़ी बिटिया को पसंद है वह ले लो और तुम दोनो मां बेटी भी ठाकुर साहब के खेतों पर मजदूरी के लिए चले जाना।दोपहर के खाने का समय अब खत्म होने वाला है।ज्यादा देर हुई तो मजदूरी कट  जाएगी।। हां हां ठीक है मुन्ना स्कूल से आता ही होगा।उसे खाना देकर बस जा ही रहे हैं। हां तो भाई निकाल तू वह लाल गोटे वाली साड़ी।देख लो पक्की जरी का काम है 1500 रुपए की साड़ी  है।1500 सुनकर उसका दिल धक से रह गया।वैसे साड़ी है तो बड़ी चोखी,इसे पहनकर कमली  ससुराल जाएगी तो बड़ी सुंदर लगेगी। लेकिन इतने पैसे!अरे जल्दी बोलो भाई साड़ी ले...

सिल्क की साड़ी

अच्छा तो तुने तीज की तैयारीयां शुरू भी कर दी।सिल्क की साड़ी! वाह। कौन से रंग की?अरे नही सुषमा,मैने तो अभी अपने लिए कुछ नहीं लिया।अभी तो 15 दिन का समय बचा है तीज के त्योहार को।देखती हूं मैं क्या लेना है? अच्छा चल बाद में बात करती हूं। ये कहकर नमिता  ने फोन कट कर दिया।  तभी...अरे मैडम, तुम्हारी बातें खत्म हो गई हों तो शाम की चाय पिला दो। हाल में बैठकर टीवी देख रहे पतिदेव ने आवाज लगाई। सहेली की सुंदर सिल्क की साड़ी को इमेजिन कर रही नमिता पतिदेव की चाय की मांग पर मन ही मन झल्ला उठी। और बडबडाते हुए किचन में जाकर चाय बनाने लगी। थोड़ी देर में वह चाय की ट्रे लेकर आती है एक कप सासु मां को और और दूसरा पति के हाथों में देते हुए कहती है। अभी से कहे देती हूं, बाद में ना कहना कि पहले क्यों नहीं कहा, मै इस बार तीज के त्यौहार में सिल्क की साड़ी लूंगी। अरे पिछले कई सालों से मायके या यहां वहां के रिश्तेदारी में मिली साड़ीयों से से ही त्यौहार निपटा रही हूं। लेकिन इस बार मैं सिल्क की नई साड़ी ले कर ही रहूंगी। यह कहकर नमिता, राकेश को  कुछ कहे कहने का मौका दिए बिना ही चाय के कप समेट कर डिनर की...