विदाई

देखो बहन ₹700 से एक पैसे कम नहीं करूंगा। आस पड़ोस की मोहल्ले में पूछ लो यह साड़ी 900 से कम में किसी को नहीं दी है मैंने। अरे काका यह लाल गोटे गोटे वाली साड़ी तो दिखाना।  बिटिया यह साड़ी काफी ऊंचे दाम की है। तेरी मां से ना खरीदी जाएगी।अरे काहे नहीं खरीदी जाएगी यह साड़ी,जब हमारी बिटिया को पसंद है। अंगोछे में अपने गीले हाथो को पोंछते हुए घर से बाहर निकल कर रामदीन बोला।अरे बाबूजी आपने खाना खा लिया। हां बिटिया। मैं वापस से  अपने जमीन पर जा रहा हूं।अरे भाग्यवान ,जल्दी से जो साड़ी बिटिया को पसंद है वह ले लो और तुम दोनो मां बेटी भी ठाकुर साहब के खेतों पर मजदूरी के लिए चले जाना।दोपहर के खाने का समय अब खत्म होने वाला है।ज्यादा देर हुई तो मजदूरी कट  जाएगी।। हां हां ठीक है मुन्ना स्कूल से आता ही होगा।उसे खाना देकर बस जा ही रहे हैं। हां तो भाई निकाल तू वह लाल गोटे वाली साड़ी।देख लो पक्की जरी का काम है 1500 रुपए की साड़ी  है।1500 सुनकर उसका दिल धक से रह गया।वैसे साड़ी है तो बड़ी चोखी,इसे पहनकर कमली  ससुराल जाएगी तो बड़ी सुंदर लगेगी। लेकिन इतने पैसे!अरे जल्दी बोलो भाई साड़ी लेनी है कि नही धंधे का समय है मुझे आगे भी जाना है। फेरी वाले की आवाज से कमली की मां का ध्यान टूटा।तो हम भी कोई  बेगार ना बैठे हैं हमे भी मजूरी करने जाना है।कमली की मां तमककर बोली। 900 रुपए में देनी है तो दो ,वरना समेटो अपना ताम झाम।वह तो बच्ची को पसंद  आ गई वरना। उसकी विदाई के लिए ही तो ये साड़ी कपड़े जोड़ रहे है।देखो बहन ,बेटियां तो पंच की होती है।तो चल ना तेरी न मेरी 1000 रुपए में सौदा पक्का करते है । लाओ पैसे ,मैं भी अपने रास्ते चलूं कमली की मां साड़ी वाले को पैसा देकर साड़ी ले लेती है। इतने में उसका 11 साल का बेटा राजू स्कूल से वापस आ जाता है ।मां जोड़ों की भूख लगी है,जल्दी से खाना दे दे। कमली अपने भाई को खाना पड़ोस देती है।खाना देखते ही राजू झल्ला उठा। फिर से वही मार भात और आलू  का भरता।मां कितने दिनों से तूने दाल नहीं बनाई। देख बेटाअब तू बड़ा हो गया है। घर की बातें समझा कर।  तेरी दीदी की विदाई करनी है, उसके ससुराल वालोंको ₹60000 देने हैं। थोड़ी बचत तो करनी पड़ेगी। राजू था तो बच्चा ही तपाक से बोल पड़ा और यह साड़ियां खरीदने के पैसे आ जाते हैं तेरे पास। मां नाराज होकर उससे कुछ कहना चाहती थीं लेकिन कमली ने इशारे से मां को रोक लिया। शाम को जब मुझे मजूरी मिलेगी तो आते वक्त तेरे लिए दाल और सब्जियां लेते आएंगे और कल बना देंगे ।चल अब खा ले खाना। कमली भाई को समझा बुझा कर मां के साथ खेतों में काम करने चली गई। इधर खेतमें.. क्यों कमली की माई, बेटी के गौने का दिन रखा कि नहीं? नहीं बहन अभी कहां? कपड़े गहने तो एक-एक करके जोड़ रहे हैं। लेकिन ₹60000 कीमांग? समझ नहीं आ रहा क्या करें ।देखो इस साल खेतों में फसल कैसी होती है? अरे अगर फसल अच्छी हो भी जावे तो अपने खाने;के अलावा कितनी बेच  लेगी की बेटी के दहेज के पैसे जुटा लेगी? अरे 5 साल हो गए इसके ब्याह को ।उस समय तो यह छोटी थी इसलिए तूने विदाई ना करी। लेकिन अब कब तक घर में बिठा रखेगी उसे ? और खेतों की फसल  बेचके और मजदूरी करके कितने पैसे जोड़े अब तक तूने? छोटा सा तो जमीन का टुकड़ा है तुम्हारे पास। उससे इतना मोह क्या रखना उसे बेचकर बेटी की विदाई कर दे नहीं तो गिरवी ही रख दे 5/ 7 सालों में जब पैसे होंगे तब छुड़ा लेना। कमली की मां बोली कुछ नहीं। वह और कमली के पिताजी तो खुद ही इसी चिंता में घुले  जा रहे थे। उन्होंने खुद भी खेतों को बेचने के बारे में कई बार सोचा लेकिन कमली यह सुनते ही ससुराल जाने से मना  कर देती।रात को खाना खाने के बाद कमली के पिताजी ने उसकी मां से कहा की कमली के ससुराल से फिर  संदेशा आया है। अगले इतवार को उन्होंने मुझे मिलने के लिए बुलाया है। दोनों एक दूसरे की तरफ देखकर चुप हो जाते हैं। दो  दिन के बाद कमली के बाबूजी उसकी ससुराल से लौट कर आते हैं और उसकी मां को कहते हैं कि कमली की विदाई का दिन अगले महीने की 5  तारीख  को पक्का हो गया है। कमली और उसकी मां दोनों उनकी और प्रश्नवाचक निगाहों से देखती हैं। अरे तुम लोग चिंता क्यों करती हो? मैंने सब इंतजाम कर लिया है lठाकुर साहब से मेरी बात हो गई है वह मदद करने को तैयार हैं हम धीरे-धीरे उनके पैसे चुका देंगे। थोड़ी देर बाद देखो, कमली के पिताजी मैं सब समझती हूं। ठाकुर साहब तो मदद करने से रहे सच-सच बताओ बात क्या है? अरे  क्या बताता बच्ची के सामने अब कोई उपाय न बचा था मैंने अपने खेत ठाकुर साहब के यहां गिरवी रख दिए हैं पूरे 4 सालों के लिए। और जो हम 4 सालों में पैसे न चुका पाए तो हमारे खेत..? उनके हो जाएंगे। कह कर कमली  के बाबूजी ने आंखें दूसरी और फेर ली। देख लीला ,और कोई उपाय भी ना  था मेरे पास कितने दिनों तक बिटिया की विदाई को रोक कर रखते हम लोग? अब यह सब छोड़ और बेटी को विदा करने की तैयारी में लग। कुछ दिनों के बाद... आज कमली की विदाई है। वह लाल गोटे वाली साड़ी में सजकर अपनी ससुराल जा रही है। कमली मां ,बापू और भाई के गले लग कर खूब रोइ। बेटी की विदाई के बाद मां बाबूजी दरवाजे पर उदास बैठे है। बिटिया अपने घर चली गई यह सोचकर उनके मन में संतोष है फिर भी आंखों से आंसू बह रहे हैं। पता नहीं यह आंसू बेटी की विदाई के गम में है या अपने खेतों को खोने के डर के?

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