उत्तर
घर में शादी का माहौल था। परिवार की सबसे छोटी बेटी की शादी थी।सुशीला देवी के तीनों बेटे और बहुएं शहर से आए हुए थे और मेहमानों की आवभगत और शादी की तैयारीयो में व्यस्त थे। अरे सुशीला जीजी कितने वर्षों बाद मिलना हुआ आपसे। हां तो तू ही तो बड़े बेटे की शादी मैं आई आज सीधे बिटिया की शादी मैं आ रही है ।छोटे और मंझले बेटों की शादी से तो तू नदारद ही थी। अरे जीजी छोड़ो भी यह गिला शिकवाअपनी बहुओं से तो मिलवाओ। हां हां अरे बड़ी बहू ,छोटी बहू , इधर तो आना यह है मेरी बुआ की लड़की तुम लोगों की मासी सास । दोनों बहुएं मासी सास से मिलकर अपने-अपने काम में लग जाती हैं। अरे जीजी तुमने अपनी मंझली बहू से तो मिलवाया ही नहीं। मंझली बहू अरे वह रही वह नीली साड़ी में, मेहमानों को चाय, शरबत दे रही है वही है। क्या बताऊं तुझे उसके बारे में ।एक पोते का मुंह ना दिखा सकी मुझे। दो बेटियों को ही जन्म दिया है उसने। मेरी बाकी दोनों बहूओ को बेटे हैं। पास ही बैठी खेल रही दोनों बच्चियां सोनालिका और मधूलिका जिन्हें सभी प्यार से सोना और मधु कहते है ।दादी मां की बातें सुनकर उदास हो जाती हैं। मधु तो अभी फिर भी छोट...