अंबिका निवास में आज शादी की हलचल-पहल थी। मां नई बहू के स्वागत की तैयारी में लगी थी। कुछ ही देर में विशाल अपनी दुल्हन दामिनी को लेकर गाड़ी से नीचे उतरा। मां ने अपनी नई-नवेली बहू की आरती उतारते हुए कहा, "भगवान करे तुम दोनों की जिंदगी में सारी खुशियां आए।" फिर शुरू हुई मुंह दिखाई की रस्म और इन सब में पूरा दिन बीत गया। दो-चार दिन में मेहमानों से भरा घर खाली हो जाता है। अब घर में सिर्फ पांच लोग हैं- मां, बाबू जी, विशाल दामिनी और विशाल का छोटा भाई सौरभ।
शादी को एक हफ्ते हुए थे। विशाल दामिनी से.. "सोच रहा हूं कि अब मैं ऑफिस जॉइन कर लूं।" दामिनी कहती है, “क्या हम हनीमून पर नहीं जा रहे हैं?” विशाल ने उत्तर दिया, “अभी शादी में बहुत खर्चा हो गया है।” आने वाले एक-दो महीने में जाते हैं न!” दामिनी ने पूछा, “पक्का!” विशाल ने उत्तर दिया, “हां! पक्का''
कुछ दिनों के बाद परिवार के सभी सदस्य रात का भोजन कर रहे हैं। पिताजी ने विशाल से से कहा, "अब तुम्हारी शादी हो गई।" सौरभ को लेकर हमें कोई चिंता नहीं है। तुम उसकी पढ़ाई देख ही रहे हो। मन में बस एक ही इच्छा है कि यह शरीर जब तक साथ दे तब तक मैं और तुम्हारी मां चार धामों की यात्रा कर लें। ,"जरूर बाबू जी, मैं आप लोगों की ये इच्छा पूरी करूंगा।" विशाल ने हामी भरते हुए दामिनी की तरफ देखा। जो उसकी ओर से सवालिया निगाहों से देख रही थी। विशाल ने सोचा कि पत्नी को खुश किया जाए कि मां-बाप को।
खाना खाने के बाद विशाल और दामिनी कमरे में जाते हैं। दामिनी नाराज लग रही थी। विशाल को समझ आ गया कि वह हनीमून पर जाने के लिए नाराज है। अगली सुबह उन्होंने बाबू जी से कहा कि "मैं सोच रहा था कि पहले दामिनी को हनीमून पर ले जाऊं, उसके बाद आप लोगों की चार धामों की यात्रा का प्रबंध करता हूं।"
बेटे की इस बात से पिता को दुख हुआ, उन्होंने कहा, "तेरी बात तो ठीक है बेटा, लेकिन जरा अपनी मां के बारे में सोचो।" वह कल से कितनी खुश है।'' विशाल बिना कुछ कुछ कहे ऑफिस चला जाता है वह बड़ी ही उलझन में था।
शाम को जब वह घर आता है और दामिनी को अपना डेबिट कार्ड दे कर कहता है। ''ये लो मेरा कार्ड तुम जहां भी जाना चाहो, वहां का टिकट बुक कर लो।'' अगले दिन उसके फोन पर बैंक से पैसे कटने का मैसेज आता है। वह समझ जाता है कि दामिनी ने हनीमून की टिकटें बुक कर ली हैं।
शाम को खाने की टेबल पर सभी काफी खुश होकर बैठे रहते हैं। अंबिका जी खुशी से बेटे का माथा चूम लेतीहै। विशाल कुछ समझ पाता इससे पहले पिताजी कहते हैं बेटा आज तुमने हमारी वर्षों पुरानी इच्छा पूरी कर दी अब हम तीन दिन बाद चारधाम की यात्रा पर निकलेंगे। विशाल आँखों ही आंखों में दामिनी का धन्यवाद करता है। आज दामिनी ने उसे एक बड़ी उलझन से निकाल दिया था।
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