मॉर्डन पत्नी
"निधि ,हम आज बाहर से ही खाना ऑर्डर कर लेते हैं। कल मैं ऑफिस से लौटता हुआ सब्जियां लेता आऊंगा तब तुम घर में खाना बना लेना।"ठीक है ,अजय ,आप जैसा ठीक समझे। तब तक मैं भी अपना सामान कपड़े वगैरा सेट कर लूंगी।"निधि और अजय की शादी को 6 महीने हुए थे। उसका मायका और ससुराल दोनों ही जौनपुर में थे। निधि हिंदी में एम . ए.कर रही थी। अजय की मां उसी कॉलेज में हिंदी की प्रोफेसर थीं। निधि देखने में जितनी सुंदर थी उतनी ही शालीन और सादगी पसंद। उसके इन्हीं गुणों के कारण उसकी पढ़ाई खत्म होते-होते अजय की मां ने उसे अपने घर की बहु बनाने का फैसला कर लिया था। अजय नोएडा की बड़ी मल्टीनेशनल कंपनी में अच्छे पद पर काम करता था। जब उसकी मां ने निधि को पसंद किया
तो वह मना तो नहीं कर पाया, लेकिन हमेशा से ही एक मॉडर्न पत्नी के सपने देखने वाला अजय निधि की साड़ी पहनी हुईं फोटो देखकर कुछ खास खुश नहीं हुआ। शादी के बाद जब अजय की मां ने उसे निधि को अपने साथ नोएडा ले जाने को कहा तो अजय न कहा"दिवाली पर आऊंगा तो ले जाऊंगा।तब तक वहां थोड़ी व्यवस्था भी हो जाएगी।"सभी को बात ठीक लगी। इस तरह शादी के 15 दिनों के बाद वह वापस नोएडा चला गया। ऐसा नहीं था कि की सुंदरता और स्वभाव को देखकर उसके प्रति आकर्षित नहीं था लेकिन जैसे ही उसके दिमाग में साथ काम करने वाली सहकर्मी लड़कियां और दोस्तों की मॉडर्न पत्नियों की छवि आती तो उसे निधि उनके सामने
कमतर लगने लगती। कई बार वह निधि को अपने ऑफिस में होने वाली पार्टियों की तस्वीर भेजा करता। ताकि निधि भी वैसे माहौल में ढलने की कोशिश करे। लेकिन निधि इस बात को समझ नहीं पाई। इस बार जब वह घर आया तो उसके पास निधि को ले जाने के अलावा कोई और रास्ता नहीं था। तो अंततः वह निधि को लेकर नोएडा आ गया था। आज शाम ऑफिस से लौटते ही "निधि, एक कप चाय पिला दो ।फिर मैं कपड़े बदलकर बाहर से सब्जियां लेकर आता हूं"इसकी जरूरत नहीं है। मैं सब्जियां ले आई हूं।"निधि ने मुस्कुरा कर जवाब दिया। लेकिन अजय के तो चेहरे का रंग ही बदल गया।"क्या?तुम बाहर गई थी! लेकिन क्यों?मैने तो कहा था न कि शाम को लेता आऊंगा।और ये साड़ी पहनकर ही चली गई थी?"अचानक इतने सारे सवालों को सुनकर निधि अचकचा गई।"अरे कॉलोनी के गेट पर ही तो सब्जी वाला ठेला लगाता है।और पूरा दिन घर में बैठे हुए मै भी बोर हो गई थी तो थोड़ा बाहर निकल गई।इसमें इतना नाराज होने की कौन सी बात है।"अगले दिन शामें में निधि बैठकर टीवी देख रही थी तभी डोर बेल बजती है। निधि
ने सोचा शायद अजय होगा और वह दरवाजा खोलने जाती है। सामने एक सुंदर और स्मार्ट लड़की खड़ी थी।" आप निधि हैं?अजय की पत्नी।"जी हां, लेकिन माफ कीजिएगा मैंने आपको पहचाना नहीं।"मैं रिया, तुम्हारे ऊपर वाले फ्लोर में रहती हूं। अजय और मैं एक ही ऑफिस में काम करते हैं। लेकिन उसने बताया नहीं कि तुम आई हो। वह तो कह रहा था कि तुम दो-तीन महीने के बाद आओगी।"उसकी बात सुनकर निधि भी सकते में पड़ गई। लेकिन उसने तुरंत बात को बदलते हुए रिया को अंदर बुला लिया। वह दोनों बैठ कर बातें कर रही थी कि तभी अजय भी ऑफिस से घर आ जाता है। रिया को देखकर उसका चेहरा उतर जाता है। "रिया तुम !"हां हां, मैं लेकिन पहले यह बताओ तुमने हम सबसे झूठ क्यों कहा कि तुम निधि को अपने साथ नहीं लाए हो ।वह तो अच्छा हुआ जो मैंने इसे बालकनी में कपड़े सुखाते देखा और सीधे इससे मिलने चली आई। रिया और निधि दोनों अजय की ओर देख रही थी। आखिर निधि भी जानना चाहती थी कि की अजय ऐसा क्यों कर रहा है?"देखो रिया, निधि यहां नई है और अभी बड़े शहर के तौर तरीकों से वाकिफ नहीं है। जब वह यहां के रंग ढंग में ढल जाती तो मैं खुद ही उसे तुम सब से मिलवा देता।"एक मिनट अजय, अगर तुम्हारा मतलब मेरे कपड़ों और रहने के तरीके से है तो मैं तुम्हें स्पष्ट बता दूं कि मैं ऐसे ही रहना पसंद करती हूं। और अगर तुम्हारी नजर में छोटे कपड़े पहनने से आधुनिकता आती है तो माफ करना वह आधुनिकता तुम्हें ही मुबारक हो। मुझे साड़ी, सलवार कमीज ,या जरूरत पड़ने पर जींस कुर्ती पहनने से भी परहेज नहीं है। लेकिन बेकार का दिखावा और छोटे कपड़े पहनना मुझे पसंद नहीं । आधुनिकता विचारों से होती है न कि कपड़ों से। अगर तुम्हें मेरा र
-सहन पसंद नहीं है तो मैं कल ही जौनपुर वापस चली जाऊंगी और अपनी पीएचडी पूरी करूंगी।"यह कहकर वह अपने कमरे में चली जाती है।"अजय तुम इतनी छोटी सोच रखते हो। लक्की हो तुम, जो तुम्हे निधि जैसी सुलझे विचारों वाली पत्नी मिली है। वर्ना कई लड़कियां तो शहर की चमक दमक में ऐसी खो जाती हैं कि उन्हें खुद के अलावा अपने पति और परिवार की भी फिक्र नहीं होती।"बोलकर रिया भी चली जाती है। अजय को अपनी गलती का एहसास होता है "निधि मुझे माफ कर दो। मेरी आंखों पर दिखावे की जो पट्टी पड़ी थी वह उतर चुकी है। सच मे आधुनिकता हमारे विचार और व्यवहार में होनी चाहिए। ना कि केवल कपड़ों में।"उसे सच्चे दिल से माफी मांगता देखकर निधि उसे माफ कर देती करते है।और दोनों एक नए जीवन की शुरुआत करते हैं।
वाह क्या बात है, बहुत बढ़िया लेख। सही तो है... बुद्धि - विवेक से आधुनिक होना चाहिए ना कि छोटे कपड़ों से।
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