बदलाव
"भाभी! भैया! मेरा प्रमोशन हो गया है और सैलरी भी बढ़ गई है!"
मीना और राजीव की आंखों में खुशी के आंसू छलक उठते हैं।
"बेटा, आज हमें सच में लग रहा है कि हमारी मेहनत सफल हुई है। अब हमारे सिर पर से चिंता का बोझ हट गया है। तूने हमारी लाज रख ली।"वैसे तो मीना और राजीव राकेश की भाई भाभी थे। लेकिन वह उसे अपना बेटा ही समझते थे।
मुंबई के एक पुराने इलाके में राजीव और उसकी पत्नी मीना एक छोटे से फ्लैट में रहते थे। राजीव का छोटा भाई राकेश, जो उनके माता-पिता के देहांत के समय सिर्फ पाँच साल का था, उन्हें ही माँ-बाप मानकर बड़ा हुआ था। मीना ने अपने बच्चे न होने के बावजूद राकेश को अपने बेटे की तरह पाला।मीना ऑफिस जाने के समय कहती:"राकेश बेटा, खाना खा लेना, अगर मैं थोड़ा लेट हो जाऊंगी तो कहीं इधर-उधर नहीं GGजाना । घर में बैठकर ध्यान से पढ़ाई करना।"
और राकेश हमेशा मुस्कुराकर जवाब देता:
"हाँ भाभी, आप चिंता मत करो। मैं खूब मन लगाकर पढ़ूंगा ।"राजीव टैक्सी चलाते थे और बड़ी मुश्किल से घर चलाते थे, मीना भी उनकी मदद के लिए एक छोटे से प्राइवेट ऑफिस में काम करती थी।किन उन्होंने कभी राकेश की पढ़ाई में कमी नहीं आने दी। राकेश भी मेहनती निकला। उसने इंजीनियरिंग की और फिर एक मल्टीनेशनल कंपनी में जॉब मिल गई।धीरे-धीरे सब कुछ अच्छा चल रहा था। फिर राकेश की शादी तय हुई रश्मि से, जो एक मॉडर्न और तेज़ सोच वाली लड़की थी। शादी के बाद शुरू में सब ठीक चला, लेकिन कुछ महीनों बाद माहौल बदलने लगा।रश्मि (एक दिन राकेश से):"राकेश, मैं कब तक इस छोटे से फ्लैट में, भैया-भाभी के साथ रहूंगी? हमें भी प्राइवेसी चाहिए। मेरी सारी फ्रेंड्स का अपना घर है। और मुझे तो इस पिछड़े हुए इलाके में इस पुराने से घर में अपने दोस्तों को बुलाते हुए भी शर्म महसूस होती है।"
राकेश थोड़ा झिझकते हुए कहता है कि"रश्मि, तुम जानती हो, भैया-भाभी ने मुझे पाला है। मैं उनसे अलग कैसे रह सकता हूँ?"
रश्मि नाराज होकर कहने लगती है की
"तो क्या मैं हमेशा इस माहौल में घुटती रहूं? मुझे भी अपनी पहचान चाहिए। हम अपनी दुनिया बसाएं, इसमें क्या गलत है? अगर तुम मुझे खुशियां नहीं दे सकते थे तुम मुझसे शादी ही क्यों की?"राकेश बेचैन हो गया। उसे समझ नहीं आ रहा था कि क्या करें क्या ना करें। उस रात वह छत पर बैठा सोच रहा था।तभी उसकी भाभी मीना उसके पास आई।
"राकेश, सब ठीक है ना? मैं देख रही हूं कि पिछले कुछ दिनों से तुम कुछ खोए खोए हुए से नजर आ रहे हो।"राकेश आँखें झुकाकर कहता है कि "भाभी… रश्मि चाहती है कि हम अलग रहें। मैंने उसे कितना समझाया लेकिन वह हैं कि मेरी कोई बात सुनने को तैयार ही नहीं।"मीना एक पल के लिए खामोश हो जाती है फिर कहती है कि "शायद वह अपनी जगह गलत नहीं उसके भी कुछ अपने सपने होंगे मैं तो कहूंगी कि अब उसका ध्यान रखना तुम्हारी जिम्मेदारी है।"लेकिन भाभी मैं आपलोगों को छोड़कर कैसे चला जाऊं?"अरे तो कौन सा तुम दूसरे शहर में जा रहे हो? बीच-बीच में हमसे मिलने आते रहना। साथ रहकर दिलों में कड़वाहट रखने से अच्छा है की दूर-दूर रहकर भी प्यार भरा रिश्ता निभाया जाए।"मीना की बातों को समझते हुए कुछ दिनों के बाद राकेश अपनी पत्नी रश्मि के साथ नए घर में रहने चला जाता है। लेकिन हर छुट्टी के दिन वे दोनों भाई भाभी से मिलने जरूर आते हैं। समय के साथ रश्मि भी अब परिपक्व हो गई है। और उसे भी राकेश के जीवन में भैया भाभी की अहमियत समझ में आने लगी है। एक दिन"भाभी मुझे अपनी गलती का एहसास हो गया है । मैं चाहती हूं कि आप दोनों हमारे साथ चलकर हमारे घर में रहे।"रश्मि तुम्हारा इतना कहना ही हमारे लिए काफी है। लेकिन अभी जैसा चल रहा है वैसा ही चलने दो। तुम्हारे दिल में हमारे लिए प्यार बना रहे वही काफी है। और एक दूसरे की जरूरत पर तो हम खड़े हैं ही।"इतना कह कर मीना प्यार से रश्मि को गले लगा लेती है। रश्मि में आए इस बदलाव को देखकर राजीव और राकेश भी मुस्कुराने लगते हैं।
टिप्पणियाँ
एक टिप्पणी भेजें