झूमके

 "देखो बहू, मैं तुमसेआखिरी बार पूछ रही हूं। सीधे-सीधे मेरे झुमके वापस कर दो। नहीं तो ,मुझसे बुरा कोई नहीं होगा।"लेकिन मां जी ,मैंने कितनी बार कहा आपसे की मैं आपके झुमको के बारे में कुछ नहीं जानती। आप मेरा भरोसा क्यों नहीं करती?"अरे ऐसे कैसे कर लूं, मैं तेरा भरोसा? और घर में हम दोनों के अलावा था ही कौन? मैने गौरव और उसके पापा को भी फोन कर दिया है। वह दोनों भी दुकान बंद करके घर आते ही होंगे।"मालती जी लगातार अपनी बहू शिप्रा पर झुमके चोरी करने का इल्जाम लगाती जा रही थी।  शिप्रा के लाख समझाने और सफाई देने का उनके ऊपर कोई असर नहीं हो रहा था। थोड़ी देर में शिप्रा के ससुर राधेश्याम जी और उसके पति गौरव भी दुकान से वापस आ जाते हैं। शहर के बीचो-बीच मार्केट में उनकी  बड़ी सी कपड़ों की दुकान थी। शिप्रा और गौरव की शादी को साल भर होने को आए। मालती जी आए दिन शिप्रा को छोटी-छोटी बातों पर झिड़क दिया करती थी ।कभी कम दहेज लाने की शिकायत, तो कभी साधारण परिवार से होने का ताना। लेकिन आज तो हद ही हो गई। असल में आज सुबह मालती जी को अपनी सहेलियों के साथ महिला मंडल के किसी  कार्यक्रम में जाना था। ऐसे कार्यक्रमों में उन लोगों को अपने कपड़े और गहने दिखा कर शेखी बघारने का मौका भी मिल जाता था। तो मालती जी ने भी अपनी महंगी सिल्क की साड़ी और सुंदर झुमके निकाल कर रखें थे । जब तक वह नहा कर वापस आई उनके झुमके गायब थे, जिसका सारा इल्जाम उन्होंने अपनी बहू शिप्रा के माथे मढ दिया। राधेश्याम जी अपनी पत्नी को समझने का प्रयास करते हैं"अरे भाग्यवान, बहू को तुम्हारे झुमके लेने की क्या जरूरत है ? उसके पास अपने गहने हैं ना। " तुमने इधर-उधर कहीं रख दिए होंगे। एक बार अच्छे से अपने कमरे में देख लो।"मैंने सभी जगह देख लिया है ।कहीं नहीं मिल रहे । मैं बताती हूं इसने झुमके क्यों कर चुराए हैं? अगले महीने इसकी छोटी बहन की  शादी है। 2 दिन पहले ही यह मुझसे पूछ रही थी की शगुन में क्या देना है? मैंने कहा था कि पायल और  ₹2100 का लिफाफा दे देंगे। तभी इसने बुरा सा मुंह बनाया था। अभी मेरे झुमके चुरा कर अपनी बहन की शादी में उसे दे देगी।"इतना बड़ा इलज़ाम सुनकर शिप्रा का मुंह खुला का खुला रह गया।" मां कहीं कामवाली बाई ने.."चुप कर। उसके जाने के बाद मैं अलमारी से अपने झुमके  निकाल कर रखे थे।"गौरव को बात पूरी करने से पहले ही मालती जी ने  झिड़क दिया। सब लोग कान खोल कर सुन लो ।अगर इसने आधे घंटे के अंदर मेरे झुमके वापस नहीं किए, तो मैं इसके मायके में फोन लगाकर शिकायत करुंगी।"क्या कह रही हो तुम मालती, घर की बात बहू के मायके तक फैलाओगी?"तो समझा दो अपनी लाडली बहू को मेरे झूमके वापस कर दे। नहीं तो इसके मायके वालों को भी तो पता चले अपनी बेटी की करतूत। शिप्रा लगातार रोती जा रही थी। तभी मालती जी की बेटी सोनी घर में प्रवेश करती है। जो अपनी सहेली की बहन की सगाई में शामिल होने गई थी।" अरे मम्मी ,पापा,आपदोनों में किस बात को लेकर कर यह बहस हो रही है? और यह भाभी का चेहरा इतना उतरा हुआ क्यों है?यह तो रो रहीं हैं!  घर में हुआ क्या है?"हुआ क्या है? तो सुन अपनी लाडली भाभी की करतूत , इसने मेरे झु...  बोलते बोलते अचानक मालती जी की जुबान रुक गई। उनकी नजर बेटी सोनी के कानों पर जा पड़ी जिसने उनके झुमके पहने हुए थे।"यह झुमके तूने पहन रखे हैं? लेकिन तूने कब लिए?"अरे मां मैं अपनी सहेली की बहन की सगाई में जा रही थी। तैयार होकर आपके कमरे में बताने गई थी कि मैं निकल रही हूं। वहां बिस्तर पर आपके झुमके पड़े थे मुझे अच्छे लगे ,मैने पहन लिए। पर हुआ क्या है?"मै बताता हूं बेटा, कि हुआ क्या है?तुम्हारी मां इन झुमकों को अपने कमरे में न पाकर इनकी चोरी का इल्ज़ाम शिप्रा बहु पर लगा रही है।"क्या?"सोनी का मुंह आश्चर्य से खुला रह गया।"मुझे माफ कर दो भाभी , मुझे मां को बता कर झुमके पहनने चाहिए थे ।मेरी वजह से आप पर चोरी का इल्जाम लग गया।" इधर,मालती जी अपने सास होने के अंहकार में डूबी हुई थी।माफी मांगना तो दूर, उन्होने शिप्रा से प्यार के दो बोल बोलना भी पसंद नहीं किया। वह  बेटी से झुमके लेकर पहनती हैं, और पहले ही कितनी देर हो गई है ?कहकर अपने महिला मंडल के कार्यक्रम के लिए निकल पड़ती हैं। राधेश्याम जी और गौरव भी वापस अपने दुकान पर लौट जाते हैं।सोनी अपने कमरे में चली जाती है।शिप्रा वही सोफे पर बैठ जाती है। झुमके मिलने और खुद के बेकसूर साबित होने से उसने राहत की सांस ली लेकिन उसके अंदर ही अंदर कुछ दरक रहा था ।और मन में उठ रहा था, एक प्रश्न.. की आखि़र कब तक..?


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