अभी सुरेश अपनी सीट पर पहुंचा ही था कि उसका फोन बजने लगा ।पॉकेट से निकाल कर देखा तो बड़े भाई रमेश रमेश का फोन था।"अरे मुन्ना तेरी ट्रेन खुल गई क्या? सवेरे मैं तुझे लेने स्टेशन आ जाऊंगा।"सुरेश चाह कर भी बड़े भाई को मना ना कर सका। और केवल हां कह उसने फोन रख दिया। ट्रेन खुल गई और वह अपनी बर्थ पर लेट गया। उसकी आंखों में नींद कहां थी? वह पुरानी यादों में खो गया

उसका बड़ा भाई रमेश अपनी पत्नी के साथ गांव में ही रहता था, जबकि वह अपनी पत्नी के साथ शहर में रहता था। सुरेश जब काफी छोटा था तभी उसके पिता की मृत्यु हो गई थी। रमेश ने पिता के समान सुरेश की देखभाल की, उसे पढ़ाया-लिखाया और हर कदम पर उनका साथ दिया।शहर के चकाचौंध में रहते हुए, उनका गांव कम ही आना जाना होता  था। एक दिन सुरेश की की पत्नी ने कहा कि उनके गांव की संपत्ति में भी उनका हिस्सा है, जिसे उन्हें मांगना चाहिए। पहले तो सुरेश ने मना कर दिया लेकिन बार-बार पत्नी के प्रोत्साहन या यू कहे की जिद पर सुरेश ने गांव की संपत्ति अपने हिस्से की मांग करने का निर्णय लिया।


गाँव की ओर जाते समय, सुरेश के मन में बचपन की यादें ताज़ा हो गईं। उसे याद आया कि कैसे रमेश ने उसे अपने पिता की तरह स्नेह दिया था, उसकी हर जरूरत का ख्याल रखा था। इन स्मृतियों से उनका मन ख़राब हो गया था, लेकिन पत्नी की बातों से उनका मन कठोर होकर आगे बढ़ गया। ट्रेन अपने निर्धारित समय से आधे घंटे देर से स्टेशन पर पहुंची तो देखता है की बड़े भैया उसके इंतजार में स्टेशन पर खड़े हैं। "कितने दिनों बाद आया अबकी बार एक सप्ताह से पहले जाने न दूंगा। और बहू और बच्चों को क्यों नहीं लाया?"सुरेश कुछ भी ना  कह सका।


गांव पहुंच कर सुरेश ने देखा कि रमेश की पत्नी और बच्चे उसे देखकर बेहद खुश हो गए। भाभी ने उसके पसंद की न जाने कितनी चीजें बना रखी थीं। उन लोगों की स्नेहपूर्ण स्वागत को देखकर सुरेश का दिल पिघलने लगा। कुछ दिन बाद, सुरेश ने देखा कि रमेश के दोनों बच्चों में गहरा प्यार और समझदारी है।  यह देखकर सुरेश अपने बचपन में चला जाता था।यहाँ पत्नी ने बार-बार फोन करके पूछती कि क्या उसने बड़े भाई से बात की? वह अजीब उलझन में था क्या करे क्या नहीं? एक दिन सुरेश रात को अपनी पत्नी से फोन पर बात कह रहा था कि "नहीं अभी तक मैने भाई से कोई बात नहीं  की है। तुम चिंता ना करो  एक-दो दिन में मैं उनसे बात कर लूंगा।"  उसकी भाभी उसके कमरे में दूध रखने आ रही थीं।उसके कानों में यह बातें पड़ी।वह ज्यादा तो कुछ समझ नहीं पाई।लेकिन उसे लगा कि कोई ना कोई बात तो जरूर है। वह अपने कमरे में आती है और अपने पति से कहती है कि ''तुम्हें नहीं लगता कि देवर जी कुछ परेशान से दिख रहे हैं। वह इस बार जब से आए हैं कुछ खोए खोए से नजर आ रहे हैं।"तुम ठीक कहती हो मुझे भी एक दो बार ऐसा लगा ।अच्छा, मैं कल ही उससे बात करता हूं।" अगले दिन शाम के समय दोनों भाई  बाहर बरामदे में बैठे थे। रमेश ने बात की शुरुआत की "मुन्ना देख रहा हूं कि इस बार तू कुछ खोया खोया सा लग रहा है अगर तुझे कोई परेशानी है तो मुझे बता आखिर बात क्या है?"सुरेश को लगा की यही बंटवारे की बात करने का सबसे अच्छा समय है। "वह भैया मैं यह कह रहा था.. अभी उसने अपनी बात पूरी भी नहीं की थी कि तभी एक शोर सा सुनाई दिया। पड़ोस में रहने वाला दीनानाथ अपने बच्चों को लेकर उनके दरवाजे पर आया और कहने लगा की आपके बड़े बेटे ने मेरे 

बच्चे को मारा है। सभी को आश्चर्य हुआ क्योंकि राजू तो बड़ा ही होशियार बच्चा था। पीछे-पीछे राजू भी अपने छोटे भाई के साथ आता है। रमेश जी  गुस्से में राजू से पूछते हैं कि"तुमने इसे क्यों मारा?"पापा, इसने पहले सोनू की गेंद छीन ली। और मांगने पर उसे ही पीटने लगा अगर कोई मेरे छोटे भाई को मारेगा तो मैं उसे नहीं छोड़ने वाला।"8 साल के नन्हे राजू की बात सुनकर सुरेश अतीत में चला गया कि ऐसे ही तो उसके भी बड़े भैया हमेशा उसकी पीठ पर खड़े रहते थे। मजाल है जो गांव का कोई लड़का उसकी और आंख उठाकर भी देख ले। और आज वह उसी बड़े भाई से हिस्सा मांगने आ गया है वह अच्छी तरह जानता है कि एक बार कहने पर भैया  उसे मना नहीं करेंगे लेकिन क्या यह प्रेम और अपनापन बना रह पाएगा मन में एक बार गांठ पड़ जाए तो उसका खुलना मुश्किल होता है। नहीं नहीं वह अपने और बड़े भाई के बीच यह गांठ कभी नहीं पड़ने देगा।" हां तो मुन्ना क्या कर रहा था तू?"भैया की आवाज से उसकी तंद्रा टूटी जो जो तब तक पड़ोसी को समझा बूझाकर वापस भेज चुके थे। "कुछ नहीं भैया कोई परेशानी नहीं है मैं वह सोच रहा था कि अब मुझे वापस जाना चाहिए ।"अरे इतनी जल्दी ! रमेश ने कहा।  सुरेश कहता है की फिर जल्दी ही आऊंगा तो ठीक है जा।लेकिन इस बार बहू और बच्चों को लेकर ही आना। आखिर बच्चों को भी तो पता चले कि उनका असली घर परिवार खेत खलिहान संपत्ति सभी कुछ यहां पर है। सुरेश केवल मुस्कुरा कर रह गया। क्योंकि उसने समय रहते अपने रिश्ते को गांठ पड़ने से जो बचा लिया था।





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