भेद भाव

अपने नित्य के पूजा पाठ आदि से निवृत  होकर सुमित्रा जी,बाहर घर के बरामदे में बैठी ही थीं कि सामने से पड़ोस की सुमन भाभी, उन्हें देख वहां आ जाती हैं। "बधाई हो , काकी जी, सुना आपकी पोती गुड़िया मैट्रिक की परीक्षा में पूरे कस्बे में अव्वल आई है।"हां आई तो है, कल शाम ही परीक्षा का रिजल्ट हुआ है। दोनों मां बेटी खुशी में बावली हुई जा रही हैं।"तो क्या आप खुश नहीं है काकी? अरे आपकी पोती ने आपका नाम रोशन कर दिया।"हां वह सब तो ठीक है, लेकिन है तो लड़की ही,ज्यादा से ज्यादा क्या कर लेगी। दो-चार सालों में उसकी शादी कर देंगे तो दूसरे के घर की हो जाएगी। ऐसे में उसे आगे पढ़ाकर क्यों बेकार का खर्च बढ़ा ना ।अरे, नाम तो मेरा पोता रोशन करेगा।"सुमित्रा देवी ने पास में खेलते हुए 8 साल के पोते मोनू की तरफ इशारा करते हुए कहा।"अब जमाना बदल गया है लड़कियों को मौक दिया जाए तो वह भी कहां से कहां पहुंच रही हैं। "सुमन की बातों को सुनकर सुमित्रा  देवी ने ऐसा मुंह बिचकाया की सुमन ने वहां से उठ जाने में ही अपनी भलाई समझी।" अच्छा काकी मै चलती हूं।"
यह थी सुमित्रा देवी, पुराने विचारों वाली  एक दबंग स्वभाव की महिला। इनके दो बेटे और बहुएं हैं। बड़ा बेटा रमेश और उसकी पत्नी मधु, छोटा बेटा रोहन और उसकी पत्नी शालिनी। बड़ा बेटा पास के शहर में  एक अच्छी नौकरी करता है। और हर सप्ताहांत में परिवार के पास आ जाता  है। इस दंपति को एक बेटी है। जिसे सभी प्यार से गुडिया कहते हैं। दूसरा बेटा रोहन, इसी कस्बे में एक बैंक में काम करता है। और उनका एक 8 साल का बेटा है, मोनू। वैसे तो परिवार में सभी कुछ ठीक-ठाक ही चल रहा है लेकिन सुमित्रा जी पोते और पोती  में काफी भेदभाव करती हैं। छोटी बहू को ज्यादा मान देती है क्योंकि वह एक बेटे की मां है। जबकि गुड़िया काफी होशियार बच्ची है और आज मैट्रिक की परीक्षा वह अव्वल भी आई है। दादी मां की पड़ोसन से होने वाली बातों को सुनकर गुड़िया घबराई हुई सी अपनी मां के पास आती है"मम्मी, दादी मां कह रही थी कि वह मुझे आगे पढ़ने नहीं देगी, लेकिन मम्मी मुझे आगे पढ़ाई करनी है।"तू चिंता मत कर मैं आज ही तेरे पापा से बात करती हूं। मधु ने मन ही मन में सोचा कि अब तक तो मैं अपनी बेटी के साथ होने वाले भेदभाव को सहती आई । लेकिन अब नहीं ,यह मेरी बेटी की  जिंदगी का सवाल है । पहले तो मधु ने सुमित्रा देवी को समझाना चाहा कि वह अपनी बेटी को आगे पढ़ाएंगी । लेकिन उन्होंने साफ-साफ मना कर दिया। "देख बहू, अब गुड़िया को घर के काम काज सिखाओ। आगे पढ़ कर क्या कर लेगी कल को तुम लोगों की तरह ही चूल्हा चौका करेगी।"और जो पढ़ाई लिखाई पर पैसे बचेंगे वह इसकी शादी में काम आ जाएंगे। अरे जितना पढ़ना लिखना होगा हमारा मोनू पढ़ लेगा ।"कहकर दादीमां अपने पोते को लाड लड़ाने लगी । सासू मां की बातें सुनकर छोटी बहू शालिनी में एक कुटिल सी मुस्कान बिखेर दी । जिसे देखकर मधु को काफी अपमान महसूस हुआ। उसने अपने पति को फोन पर सारी बातें बताई। उन्होंने कहा," चिंता मत करो मैं अगले सप्ताह घर आता हूं तो मां से बात करता हूं।"
कुछ दिनों के बाद। मां, आप समझती क्यों नहीं आजकल के जमाने में लड़कियां कहां से कहां पहुंच रही हैं औरआप ऐसी बातें कर रही हैं।  क्या आप नहीं चाहते कि गुड़िया का भविष्य बने। देख बेटा मैं जो कह दिया सो कह दिया अगर तुझे मेरी बात नहीं माननी ,तो अपने परिवार को यहां से ले जा। उसके बाद मेरा तुझसे और तेरे परिवार से कोई रिश्ता ना रहेगा सुमित्रा जी ने आखिरी दांव खेला। लेकिन उन्हें नहीं पता था उनका यह पास उल्टा पड़ने वाला है। गुड़िया के पापा अपनी पत्नी और बच्चों समेत भारी मन से घर छोड़कर चले गए। जाते समय सुमित्रा जी उन लोगों को आशीर्वाद तक नहीं दिया और मुंह फेर कर खड़ी हो गई।  वह इस कदर नाराज हुई कि कि वह उनका फोन तक नहीं उठाती थी। धीरे-धीरे उनका संपर्क टूट गया। घटना को कई साल बीत गए। दादी मां के लाड प्यार ने मोनू को इस कदर बिगाड़ दिया है कि उसकी गिनती मोहल्ले के लफंगों में होने लगी है। एक दिन शाम के समय रोहन के फोन पर पुलिस थाने से फोन आता है । पुलिस ने रास्ते में मारपीट करते हुए उसे पकड़ा था। रोहन भागता दौड़ता हुआ पुलिस थाने जाता है और हाथ पैर जोड़कर और दोबारा ऐसा न करने का आश्वासन देकर उसे घर लाता है। इस घटना से सुमित्रा देवी इतनी दुखी हो जाती है कि उनका ब्लड प्रेशर काफी बढ़ जाता है और वह बेहोश हो जाती है। उन्हें अस्पताल ले जाया जाता है। उनकी स्थिति को देखते हुए डॉक्टर उन्हें पास के शहर ले जाने को कहते हैं उन्हें शहर के अस्पताल लाया जाता है। यहां उनकी हालत खतरे से बाहर है और वह होश में आ चुकी है।आप कैसा महसूस कर रही हैं अब? कमरे में बैठी लेडी डॉक्टरने कहा। लेकिन मैं कहां हूं? सुमित्रा देवी ने धीरे से पूछा। आपका ब्लड प्रेशर बहुत बढ़ गया था और आप बेहोश हो गई थी आपको शहर के अस्पताल लाया गया है और बहुत मुश्किल से डॉक्टर साहब ने आपकी जान बचाई है पास खड़ी नर्स ने कहा।सुमित्रा देवी ने हाथ जोड़ते हुए कहा बहुत-बहुत आभार मैडम जी आपका ,आपने मेरी जान बचाई। डॉक्टर उनके हाथों को अपने हाथों में ले लेती है यह क्या कर रही हैं आप दादी मां? पहचाना नहीं क्या ?मैं आपकी गुड़िया।गुड़िया, मेरी पोती गुड़िया! हां  मां,आपकी पोती गुड़िया कमरे में प्रवेश करते हुए गुड़िया के पिताजी ने कहा। सामने बेटे बहु को देखकर सुमित्रा जी आश्चर्यचकित थीं। मां,आपकी पोती शहर की बड़ी डॉक्टर बन गई है। मैं जैसे ही आपको अस्पताल लेकर आया इसने देखते ही हमें पहचान लिया।इसी ने आपका इलाज किया हैऔर पिछले 24 घंटे से आपकी देखभाल कर रही है। रोहन ने कहा ।अपने परिवार को सामने देखकर सुमित्रा देवी 
भावुक हो जाती हैं। मुझे माफ कर दो मेरे बच्चों। मैं वाकई गलत थी मेरी पोती ने न केवल मेरी जान बचाई बल्कि इसने हमारा नाम भी ऊंचा कर दिया। गुड़िया दादी मां के आंसू पोंछती है दादी मां,अभी आपको ज्यादा बोलना मना है। पूरा परिवार फिर से एक हो चुका था।







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