एकता
शर्मा निवास में रामनाथ जी अपनी पत्नी सुलोचना जी और दो बेटे बहुओं के साथ रहते थे। दोनों बेटे अच्छे पदों पर कार्यरत थे। जबकि रामनाथ जी सेवानिवृत हो चुके थे।घर में सुरेखा बड़ी बहू थीं, जो पिछले दस सालों से परिवार को संभाल रही थीं। वे घरेलू कामकाज में निपुण थीं और पूरे घर को बड़ी सादगी और प्रेम से चलाती थीं। कुछ महीने पहले ही परिवार में नई बहू, निधि आई थीं। वह एक नौकरीपेशा महिला थीं, जो दिनभर ऑफिस जातीं और फिर घर के कामों में सुरेखा की मदद करतीं। सुरेखा भी बड़े प्यार से घर के कामकाज और तौर तरीके सिखाती थी। वही निधि ने भी सुरेखा को ऑनलाइन शॉपिंग,पेमेंट जैसे नए तौर तरीके सीख कर उसके काम को आसान बना दिया था।
हालाँकि, दोनों की ज़िंदगी और दिनचर्या अलग-अलग थीं, लेकिन उनके रिश्ते में बेहद प्यार और सम्मान था। सुरेखा निधि को अपनी छोटी बहन की तरह मानती थीं और निधि भी सुरेखा की बहुत इज्जत करती थीं। दोनों हमेशा एक-दूसरे की मदद करतीं, चाहे घर का काम हो या परिवार की जिम्मेदारी। एक दिन सुलोचना की अपनी बड़ी बहू से कहती हैं कि "सुरेखा, मेरी ननद यानी तुम्हारी बुआ सास आने वाली है। वह निधि की शादी में बीमारी की वजह से नहीं आ पाई थी। उससे मिलने आना चाहती हैं। तू तो उनका स्वभाव जानती है, लेकिन ,निधि तो इस घर में नई है।"मां जी,आप चिंता ना करें। मैं सब संभाल लूंगी।"ठीक है बेटा ,तू,देख लेना वरना मुझे तो उनके आने के नाम से ही घबराहट हो रही है।"
असल में बुआ जी का स्वभाव थोड़ा नकारात्मक था। उन्हें जहाँ भी मौका मिलता, वहाँ घर में फूट डालने की कोशिश करती थीं। कुछ दिनों बाद बुआ जी आती हैं।पहले ही दिन, बुआ जी ने देख लिया कि बड़ी बहू घर संभाल रही है और छोटी बहू ऑफिस जा रही है। उन्होंने धीरे-धीरे ज़हर घोलना शुरू किया।वे सुरेखा से बोलीं—"बहू, तुम तो घर में रहकर दिनभर काम करती हो, और छोटी बहू आराम से ऑफिस जाती है! ऐसा लगता है कि वह कहीं की महारानी है। और तू क्या उसकी नौकर लगी है।अरे तू घर की बड़ी बहू है। तू ही अकेले पूरा घर क्यों संभाले।सुरेखा मुस्कुराईं और बोलीं, "अरे बुआ जी, ऐसा कुछ नहीं है। निधि भी घर का पूरा ध्यान रखती है। वह घर और बाहर दोनों संभाल रही है।"
बुआ जी चुप हो गईं, लेकिन वे इतनी जल्दी हार मानने वालों में से नहीं थींअगले दिन, बुआ जी ने निधि से कहा—"निधि बेटा, तुझे देखती हूं तो बड़ा तरस आता है तुझ पर। इतना मेहनत करके नौकरी करती है, चार पैसे कमा कर घर में लाती है फिर भी घर में तुम्हारी कोई अहमियत नहीं है। सारी जिम्मेदारी तो सुरेखा ही निभा रही हैं। जिसे देखो सबकी जुबां पर बड़ी बहू का ही नाम रहता है तुझे भी अपनी जगह बनानी चाहिए!"निधि समझदार थीं। तुरंत जवाब दिया—"बुआ जी, मैं और दीदी एक ही परिवार का हिस्सा हैं। हम कोई प्रतियोगिता नहीं कर रहे हैं। दीदी सारा दिन घर संभालती हैं तभी मैं बाहर जाकर नौकरी कर पाती हूं।बुआ जी को यह बात पसंद नहीं आई। वे लगातार दोनों बहुओं के कान भरती रहीं, लेकिन दोनों बहुओं ने बिल्कुल ध्यान नहीं दिया।
कुछ दिनों बाद, निधि और सुरेखा ने मिलकर एक योजना बनाई। उन्होंने तय किया कि वे बुआ जी को उनके ही तरीके से जवाब देंगी।एक दिन जब बुआ जी फिर से अकेले में भड़काने की कोशिश कर रही थीं, तब निधि ने मुस्कुराते हुए कहा—"बुआ जी, आप बिल्कुल सही कह रही हैं! हमें अपने अधिकार के लिए लड़ना चाहिए।"उसने सुरेखा और अपनी सास सुलोचना को आवाज़ लगाई और उन्हें भी वही बुला लिया।"हाँ बुआ जी, तो क्या कह रही थी आप। अब सबके सामने कहिए। और हां घर जिम्मेदारियां और कामों का भी हिसाब किताब सबके सामने ही आज कर ही दीजिए।"बुआ जी हैरान रह गईं। वे बड़बड़ाने लगीं, "अरे, मैं क्यों यह सब ? मैं तो मेहमान हूँ!"निधि ने कहा, "बिल्कुल बुआ जी, लेकिन आप जिस तरह कई दिनों से हमें भड़काने की कोशिश कर रही थीं, उससे तो लग रहा था कि आपको हमसे ज्यादा चिंता है। इसलिए हमने सोचा कि आप ही यह जिम्मेदारी ले लें!"बुआ जी समझ गईं कि उनकी चाल नाकाम हो गई है। वे अपनी पोल खुलती देखकर झेंप गई।उन्होंने सुलोचना जी और बहुओं से माफी माँगी और कुछ दिनों बाद वापस गाँव लौट गईं। उनके जाने के बाद सुलोचना जी ने चैन की सांस ली। वहीं निधि सुरेखा से कह रही थी कि "अच्छा हुआ दीदी, जो आपने मुझे पहले ही बुआ जी के घर तोड़ने वाली आदत के बारे में बता दिया था। वरना क्या जाने कहीं मैं भीइनकी बातों मे आ जाती।"
निधि ने मुस्कुराते हुए कहा—
"सही कहा दीदी, लेकिन हम दोनों जानते हैं कि कोई भी हमें अलग नहीं कर सकता!"
इस तरह, दोनों बहुओं की समझदारी और प्यार ने घर को टूटने से बचा लिया।
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