अरेंज मैरिज
शालिनी ने जब आंखें खोलीं, तो उसके बगल में एक गिफ्ट बॉक्स रखा था। जिस पर लिखा था, ‘शादी की 25वीं वर्षगांठ की बधाई ’। उस बॉक्स को खोले बिना ही शालिनी अपने जीवन के 25 साल पीछे चली गई। जब उसने अपना एमबीए पूरा किया था और वह अपने सपनों की एक अलग ही दुनिया में रहती थी। शालिनी को लव मैरिज करनी थी, उसे कभी अरेंज मैरिज करनी ही नहीं थी। इसका सबसे बड़ा कारण था, परिवार। उसकाऔर उसकी सहेलियों का मानना था कि अरेंज मैरिज में परिवार हमेशा दोनों के बीच में आ जाता है।ऊपर से सास बहू की घर घर की कहानियां इसलिए उसने सोच रखा था कि वह लव मैरिज करेगी और परिवार के साथ तो बिल्कुल नहीं रहेगी।
लेकिन सब कुछ हमारे सोचे अनुसार तो होता नहीं।उसे कोई लड़का पसंद आए ,उसके पहले ही घरवालों ने उसकी शादी राजीव से तय कर दी।आखिरकार मां-पापा का मन रखने के लिए ही सही, उसे उनके मनपसंद लड़के से शादी करनी ही पड़ी।हालांकि शादी के पहले शांत और सौम्य स्वभाव वाले राजीव से मिलने के बाद वह उसे ठीक ही लगे लेकिन असल डर तो परिवार का था।खैर,इस तरह से लव मैरिज करने वाली शालिनी की अरेंज मैरिज हो गई। शादी के बाद जब शालिनी की विदाई हुई थी, तो वह गाड़ी में बैठने के बाद बहुत रो रही थी। उसकी आंखों का काजल आंसुओं के साथ बह रहा था। तभी चेहरे के सामने एक सफेद रुमाल आता है, जो किसी और ने नहीं, बल्कि उसके पति ने उसकी तरफ बढ़ाया था। रुमाल ले कर शालिनी ने आंसू पोछे। आंखों से बहा काजल उस सफेद रुमाल पर लग गया। “सॉरी! मैंने आपकी रुमाल गंदी कर दी। मैं इसे धुल दूंगी।” शालिनी ने राजीव से कहा। राजीव ने उसके हाथ से रुमाल लेते हुए सिर्फ इतना ही कहा, “कोई बात नहीं।”
थोड़े ही देर में गाड़ी राजीव के घर पहुंच गई। शालिनी को अब उनका ही सामना करना था, जिनके कारण वह अरेंज मैरिज नहीं करना चाहती थी। दरवाजे पर परिवार के सभी सदस्य आरती की थाली लिए नई दुल्हन का इंतज़ार कर रहे थे। शालिनी का स्वागत सभी ने धूम-धाम से किया। गृह प्रवेश के बाद शादी की बची हुईं रस्मों को जल्द ही खत्म किया गया। शालिनी की सास ने अपनी बेटी से कहा, “भाभी को उनके कमरे में ले जा, आराम करने दे
बहू बहुत थक गई है।” रागिनी तुरंत उठी और शालिनी को उसके कमरे में ले गई, “भाभी आप यहां आराम करिए, कुछ भी ज़रूरत हो, तो मुझे बुला लेना।”भारी लहंगे और जेवरों को उतारने के बाद शालिनी फ्रेश हो कर सो गई। काफी देर बाद उसकी आंख खुली, तो देखा कि रात के आठ बज रहे थे। राजीव को कमरे में आता देख, वह थोड़ा सकपका गई। “अरे आराम से, ऐसे झटके से नहीं उठते हैं।” राजीव बोला। हल्की मुस्कान के साथ शालिनी बोली, “लगता है कि मैं कुछ ज़्यादा ही सो गई।” तभी दरवाजे पर दस्तक के साथ उसकी सास अंदर आते हुए बोलीं, “नहीं बेटा! शादी की थकान है चंद घंटों की नींद से थोड़े जाएगी। लो खाना खा लो और उसके बाद फिर से सो जाना।”
जब शालिनी ने खाने की प्लेट देखी, तो उसकी आंखों में आंसू आ गए। प्लेट में उसकी पसंदीदा पालक पनीर की सब्जी, रोटी और मेवे की खीर थी। “मम्मी जी आपको कैसे पता कि ये मेरा पसंदीदा खाना है?” शालिनी ने अपनी सास से पूछा। इतने में रागिनी पानी की बोतल लाते हुए बोली, “ हमारे परिवार में सबको एक-दूसरे की पसंद पता है भाभी। इसलिए आपके आने से पहले ही आपके छोटे भाई और मम्मी के साथ बातचीत कर के भईया और मम्मी ने आप पर पूरी पीएचडी कर ली है। अब आपको कुछ बताने की ज़रूरत नहीं है। हमें सब पता है कि आपको क्या पसंद है और क्या नहीं।” रागिनी की ये बातें सुनकर शालिनी की आँखें आश्चर्य से खुली रह गई , “थैंक यू मम्मी! "वह बस इतना ही कह पाई। "अरे भाई, आप अपने घर परिवार को छोड़कर हमारे हमारे परिवार में आई हैं तो आपको इस नए परिवार में एडजस्ट करवाने की थोडी जिम्मेदारी हमारी भी बनती हैं।"राजीव के मुंह से ऐसा सुनकर शालिनी मुस्कुरा पड़ी।उस दिन से शालिनी के मन में परिवार को लेकर रहने वाला डर कुछ कम हो गया।कुछ दिनों के बाद शालिनी ने नौकरी करने की मंशा जाहिर की। "हां बेटा तुमने एमबीए किया है। तो जैसे राजीव और मेरी बेटी रागिनी बाहर जाकर काम करते हैं वैसे ही तुम भी कर सकती हो। इस तरह से शालिनी पति और परिवार के सहयोग से अपना करियर भी बनाया। अब शालिनी के मन से ससुराल का डर पूरी तरह खत्म हो चुका था।अब उसने परिवार को अपना माना और परिवार ने उसे अपनाया।
इस तरह से हंसी-खुशी रहते हुए शालिनी और राजीव की शादी को आज 25 साल पूरे हो चुके थे। शालिनी ने अपने अतीत से वर्तमान में आते हुए उस गिफ्ट बॉक्स को खोला, तो देखा उसमें एक खूबसूरत सा नेकलेस और साथ में प्यारा सा नोट लिखा हुआ था। "मेरे जीवन और परिवार में खुशबू की तरह समाकर महक बिखरने वाली जीवन संगिनी के लिए"।
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