नकल

 "सच निशा बड़ा ही आलीशान घर बनवाया है तुमने। तुम्हारा घर देख कर दिल खुश हो गया।"थैंक्स,यार जया। अरे मैं तो कहती हूं कि कि तू भी इसी  सोसाइटी में एक घर बुक करवा ले। अभी काफी प्लॉट्स खाली हैं यहां।" निशा की बात सुनकर जया मुस्कुराने लगती है।आज निशा की गृह प्रवेश की पूजा थी। निशा और जया एक ही कॉलोनी में किराए के घर में रहती थी। दोनों के बच्चे भी एक ही क्लास मैं पढ़ते थे और दोनों अच्छी सहेलियां बन गई थी। निशा ने कुछ दिनों पहले एक नया प्लॉट खरीदा और उस पर एक शानदार बंगला बनाया गया। घर वाकई बहुत खूबसूरत था। गृह प्रवेश की पूजा और पार्टी में आने वाले सभी लोगों की जुबान पर यही चर्चा थी। बड़े बड़े बेडरूम, खूबसूरत और महंगी पेटिंग्स से सजा हुआ लिविंग रूम,मॉड्यूलर किचेन,बड़ा सा टेरेस ,बड़े-बड़े झूमर और आधुनिक सुख सुविधा की सभी चीजें मौजूद थी वहां। वाकई निशा और उसके के पति ने काफी खर्च किया था घर बनाने में। खैर पार्टी खत्म हुई और सभी अपने-अपने घरों को  चले गए।  लेकिन जया के  दिलोंदिमाग में वह घर छा गया था। अगले दिन सुबह नाश्ते की टेबल पर वह अपने पति से कहती है ।"कितना सुंदर घर बनाया है ना। निशा और उसके पति ने।"हां वह तो है ,अच्छे खासे पैसे लग गए होंगे। मुझे लगता है उन्होंने अपने बजट से ज्यादा ही किया है।" जया के पति अमित ने नाश्ता करते-करते जवाब दिया।"निशा बता रही थी कि अभी वहां कुछ प्लॉट्स खाली है। क्या हम भी वहां अपना घर नहीं बनवा सकते।" अमित ने नाश्ता खत्म करते-करते आश्चर्य से जया की ओर देखा।कुछ भी! कहकर अमित जल्दबाजी में ऑफिस चला जाता है। ऐसा भी क्या कह दिया मैंने, जो इन्हें इतना आश्चर्य हो रहा है। अरे जब निशा वहां घर ले सकती है तो हम क्यों नहीं? वह मन ही मन बुदबुदाती है। वैसे जया दिल की अच्छी औरत थी लेकिन उसमें एक खराबी  थी कि वह दूसरों की नकल खूब करती थी।किसी की कोई अच्छी चीज  दिखी नहीं कि बस उसका मन उस चीज के लिए मचल उठता। उसे वह अपने पास भी चाहिए होती ।उसके पति ने उसे कई बार समझाया कि दूसरों  से हमेशा अपनी तुलना करना बंद करो । लेकिन वह समझने का नाम ही नहीं लेती। और इस बार तो उसका मन इतने महंगे घर पर ही आ गया था। एक दो दिन के बाद... "अजी सुनते हो, मैं वह कह रही थी कि संडे को चलकर हम एक बार वहां का प्लॉट देख आते"कौन सा प्लॉट?वही निशा की सोसायटी.. उसकी बात पूरी होने से पहले ही उसके पति ने कहा"अरे भाई, तुम समझती क्यों नहीं? मुझे अभी कोई प्लॉट या घर नहीं खरीदना।अभी मेरा बजट नहीं है ।  दो चार सालों में थोड़ी और सेविंग हो जाए तब देखेंगे।"लेकिन जया कहां समझने वाली थी ? वह अपनी ही जिद पर अड़ी रही। आखिर नाराज होकर उसके पति ने कहा कि "देखो जया, यह कोई चार पांच हजार की साड़ी या तीस पैंतीस हजार का एसी जैसा कोई सामान  नहीं जो तुम्हारे  हमेशा की  जिद पर मैं तुम्हें दिलवा देता हूं। घर बनाने में बहुत खर्चा आएगा। और मैं अगर अभी लोन भी ले लूं तो उसकी किश्त चुकाने में  मेरी आधी से ज्यादा सैलरी निकल जाएगी। बाकी घर खर्च मेंटेन करना काफी मुश्किल हो  जाएगा।"जया को पति की बात सुन कर काफी गुस्सा आता है। वह मन ही मन सोचने लगती है.. अगले सप्ताह से मोनू की फाइनल परीक्षाएं शुरू हो रही हैं । एक बार उसकी परीक्षाएं हो जाए। फिर उसे लेकर एक दो महीने के लिए  मायके जा बैठूंगी। फिर देखती हूं, कैसे नहीं मानते यह मेरी बात ? अगले सप्ताह मोनू परीक्षा का पहला पेपर देकर घर लौटता है। मम्मी जानती हो ,आज स्कूल में क्या हुआ? आर्यन को परीक्षा देने से रोक दिया गया था। फिर केवल लास्ट के 1 घंटे ही वह परीक्षा मे बैठ पाया। लेकिन क्यों? जया ने आश्चर्य से पूछा। पता नहीं निहारिका मिस  कह रही थी कि  उसकी फीस क्लियर नहीं है?  क्या? लेकिन निशा ने अपने बेटे की स्कूल फीस क्यों नहीं भरी? जया अभी सोच में डूबी हुई थी कि उसके मोबाइल पर निशा का कॉल आने लगता है। हेलो जया, मुझे तुम्हारी मदद की जरूरत है असल में घर बनाने में काफी पैसे खर्च हो गएहैं। हर महीने ई मआई भरने में भी काफी अमाउंट निकल जा रहा है। आर्यन की 3 महीने की फीस ड्यू है। स्कूल वाले उसे परीक्षा में अलाऊ नहीं कर रहे हैं।आज तो काफी रिक्वेस्ट  के बाद बैठने दिया लेकिन कल सुबह उसकी पूरी फीस जमा करवानी है। अगर तुम कुछ मदद कर सको तो। तु घबरा मत ।मै कुछ करती हूं।  फिर जया ने अमित से  बात करके निशा के बेटे की फीस भरने में मदद की। इसके बाद जया के दिमाग से आलीशान बंगले का फितूर भी उतर गया और वह अपने पति की बात भी समझ गई कि हमें अपने बजट के हिसाब से ही चलना चाहिए और दूसरों की  नकल नहीं करनी चाहिए।


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