फैसला

" अरे मैं कहती हूं कि की ये कहां की समझदारी है कुसुम की शादी के पीछे इतने पैसे खर्च करने की? 10 लाख रुपए दहेज ऊपर से बारात के स्वागत, लेन देन ,गहने ,कपड़े लगभग 8-10 लाख का और खर्चा। कुल मिलाकर 20 लाख का बजट जाएगा।" "लेकिन, सुनीता हम कर भी क्या सकते हैं ?आखिर पिताजी  ही कुसुम का  रिश्ता तय करके गए हैं। और यह भी तो देखो लड़का बैंक में मैनेजर है।तो शादी में खर्च तो आएगा ही।"घर के बड़े बेटे रमेश ने अपनी पत्नी सुनीता को समझाते हुए कहा।" शादी तय ही तो हुई है, हो









  तो नहीं गई ना। मना कर देंगे।"सुनीता ने कहा।"हां भैया, मुझे भी लगता है भाभी ठीक ही कह रही है। देखो पिताजी को रिटायरमेंट पर 50 लाख रुपए मिले थे। दो-चार लाख रुपये उनकी बीमारी में लग गए। बचे हुए पैसों में से 20 \25 लाख इस शादी पर ही खर्च कर देंगे तो हमारे लिए क्या बचेगा? आपकी भी छोटी सी नौकरी है। दो चार लाख में शादी निपटाकर बचे हुए पैसों को हम आपस में बांट लेंगे। मैं भी अपनी कपड़ो की दुकान को थोड़ा बड़ा कर लूंगा।" "लेकिन क्या मां जी इसके लिए तैयार होंगी।"छोटी बहू शिवानी ने अपनी शंका प्रकट की।"अरे होंगी कैसे नहीं ?उन्हें अपने आगे की जिंदगी तो हमारे  साथ ही बितानी है। यह बैठक चल रही थी शांति निवास में , जिसके मालिक श्याम










 लाल जी का 2 महीने पहले ही  देहांत हुआ था। श्याम लाल जी सरकारी दफ्तर में बड़े बाबू के पद से रिटायर हुए थे। रिटायरमेंट के 2 साल बाद ही उन्हें हार्ट अटैकआया और काफी कोशिशें और  इलाज के बाद भी उन्हें बचाया नहीं जा सका । वह अपने पीछे अपनी पत्नी, बेटे,बहुओं, पोते ,पोती और अपनी अविवाहित बेटी कुसुम को छोड़ गए। इस बैठक का विषय कुसुम की शादी ही थी। श्याम लाल जी कुसुम की शादी सरकारी बैंक में मैनेजर लड़के से तय कर गए थे। लेकिन अब उनके ना रहने पर उनके बेटे बहु को कुसुम की शादी में इतने पैसे खर्च करना  नागवार गुजर रहा था। जब शांति देवी को इस बात का पता चला तो उन्होंने साफ शब्दों में मना किया और कहा कि कुसुम की शादी वही होगी जहां तुम्हारे पिताजी ने तय किया है।"अरे मां हम क्या कुसुम के दुश्मन है? तुम समझती क्यों नहीं,वे लोग दहेज के लालची हैं। हमने पता किया है उनके बारे में। और तुम्हें क्या पता है कि पिताजी की बीमारी में कितने पैसे खर्च हो गए हैं? हम अच्छे घर में ही कुसम का रिश्ता तय करेंगे। और अगर फिर भी तुम्हे हमारी बात का भरोसा नहीं है तो आगे तुम जानो।हमारा इस शादी से कोई वास्ता नहीं होगा।" बेटों ने आखिरी  पासा फेंका और लाचार होकर शांति देवी को बेटों की बात माननी पड़ी। कुसुम एक होनहार और समझदार लड़की थी। अपने कॉलेज में हमेशा अव्वल आने वाली।वह सब कुछ देख समझ रही थी। लेकिन कहती भी क्या?उसने अपने आप को नियति के हाथों में सौंप दिया था।कुछ दिनों के बाद.. आज कुसुम को देखने लड़के वाले आ रहे थे।"अरे मां जी, हमारी कुसुम बड़ी भाग्यवान है। बहुत अमीर खानदान से  रिश्ता आया है और सबसे बड़ी बात यह है कि उन्हें दहेज भी नहीं चाहिए।"कुसुम की बड़ी भाभी ने बातों में चासनी लपेटते हुए कहा। तभी दरवाजे पर एक बड़ी सी गाड़ी आ कर रुकती है। लेकिन लड़के को देखते ही कुसुम की मां सकते में आ गई।"बड़ी बहू यह लड़का तो हमारी कुसुम से दुगनी उम्र का लगता है।"तभी छोटी बहू बोल पड़ती है।"मांजी इतनी ज्यादा उम्र भी नहीं है लड़के की। और आप इनकी शान शौकत और धन दौलत तो देखिए। अब सबकुछ एक साथ कहां मिलता हैं?"खैर कुसुम को लाया जाता है । लड़के के साथ उसकी बड़ी बहन आई थी।"देखिए आप लोग तो जानते ही हैं कि यह  मेरे भाई की दूसरी शादी है। उसकी पहली पत्नी की मौत को  5 साल हो चुके हैं। दोनों बच्चे भी बड़े हो रहे हैं। तो यह शादी हम सादगी से ही करेंगे।"दूसरी शादी! शांति देवी ने बहू बेटों की तरफ देखा।वे लोग बगलें झांकने लगे। तभी अचानक कुसुम खड़ी हुई "मुझे यह शादी मंजूर नहीं।"सभी लोग अवाक। किसी ने सोचा भी नहीं था कि  सीधी-सादी कुसुम ऐसा भी कर सकती है। और करती भी क्यों नहीं? यह लोग उसकी जिंदगी तबाह करने पर तुले हुए थे। खैर लड़के वाले अपना सा मुंह लेकर चले गए। मां ने राहत की सास ली और भाभियों ने कलह मचाया। लेकिन कुसुम ने साफ-साफ कह दिया कि किसी को भी मेरी शादी की चिंता करने की जरूरत नहीं मैं आगे की पढ़ाई करूगी और अपने पैरों पर खड़ी होउंगी।किसी ने भी जबरदस्ती करने की कोशिश की मै शादी के मंडप से भाग जाऊंगी।  कुसुम अपना फैसला ले चुकी थी।सब लोग ठंडे पर गए ।कुसुम ने जी तोड़ मेहनत करी। एक  साल के बाद सुबह सुबह शांति निवास के बाहर बड़ी चहल-पहल थी।मीडियाकर्मी  घर की बिटिया कुसुम का इंटरव्यू ले रहे थे।उसने राज्य लोक सेवा आयोग की परीक्षा मे टॉप किया था। रिश्तेदारों की बधाइयां आ रही थी।शांति देवी आज खुशी से फूली नहीं समा रहा थीं।  बिटिया अब बड़ी अफसर बन चुकी है अब अच्छा घर वर मिल जाएगा।वही कुसुम की जिंदगी का सौदा करने वाले उसके भाई और भाभीयां आज नजरे नीची किए खड़े थे।आज कुसुम ने बिना कुछ बोले ही उन्हें मुहतोड़ जवाब दे दिया था।

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