गृहलक्ष्मी
"अरे तुम लोग अभी तक किचन में ही लगी हुई हो। लड़के वाले बस थोड़ी देर में आते ही होंगे। यह लो।गुलाब जामुन और मिठाइयां, मैंने तो पहले ही कहा था कि समोसे और कचौड़ियां बाजार से ही ले आता हूं।"आप इतना हड़बड़ा क्यों रहे हैं? सब कुछ बस तैयार ही हैं और हमारी सीमा भी बस थोड़ी देर में ही तैयार हो जाएगी। यह हैं वर्मा जी और उनकी पत्नी रत्ना। वर्मा दंपति को तीन बेटियां हैं। आज उनकी सबसे बड़ी बेटी सीमा को देखने के लिए लड़के वाले आ रहे हैं। सीमा एक सुंदर सभ्य और गुणी लड़की है। उसकी मां सदैव कहती हैं कि कि मेरी बेटी साक्षात लक्ष्मी है, जिस घर जाएगी उसके तो भाग्य खुल जाएगे। थोड़ी देर बाद.... "हमें आपकी बेटी पसंद है। देखिए हमारी कोई मांग तो नहीं है। लेकिन मैं एक बात कहना चाहूंगी विनय के पिता को दुनिया छोड़े हुए 5 साल हो चुके हैं। उनकी जगह ही विनय की
सरकारी दफ्तर में नौकरी हुई है। विनय के दो छोटे भाई बहन भी हैं। उनकी पढ़ाई लिखाई शादी ब्याह की जिम्मेदारी सब कुछ इसे ही उठानी है।"लड़के की मां सुलोचना जी ने कहा तो रत्न जी ने कहा "बहन जी आप इस बात की चिंता ना करें मेरी बेटी लक्ष्मी जैसी है। हमेशा आपके पूरे घर को जोड़ कर रखेगी।"इस तरह विनय और सीमा का विवाह तय हो गया और कुछ दिनों के बाद इनका विवाह संपन्न भी हो गया। अब सीमा इस परिवार की बहू बनकर आ चुकी है। विनय का छोटा भाई अमृत हैदराबाद में रहकर बीटेक की पढ़ाई कर रहा था। जबकि बहन कॉलेज में पढ़ रही थी। शादी की कुछ दिनों बाद ही सीमा ने अपनी सासू मां और पति के सहयोग से परिवार की जिम्मेदारियां संभाल ली। उसने महसूस किया कि देवर को हर महीने पढ़ाई का खर्चा भेजना, ननद की पढ़ाई
लिखाई, कॉलेज, मां जी की दवाइयां और घर के खर्चे, कुल मिलाकर महीने के अत तक उसके पति का हाथ काफी तंग हो जाता था। उसने सोचा की क्यों ना मै भी कोई काम करके अपने पति का सहयोग करूं और कुछ बचत भी हो जाए। फिर कुछ दिनों में नंद सौम्या की शादी भी करनी होगी। लेकिन क्या किया जाए यह उसकी समझ में नहीं आ रहा था। सीमा के पड़ोस वाले घर में तीन लड़के रहते थे। ये लोग पढ़ाई करने के लिए दूसरे शहर से आए थे। एक दिन सीमा को उनकी बातचीत से पता चला कि उन्होंने अपने लिए टिफिन लगा रखाहै है।लेकिन खाने में ना तो स्वाद है और ना ही क्वालिटी। सीमा ने सोचा कि क्यो न इनके लिए खाना बनाकर अपने काम की शुरुआत करूं। सीमा ने अपनी सास सुलोचना जी से बात की।"लेकिन बहू घर के काम और ऊपर से तीन लड़कों का टिफिन बनाना तुझ पर काफी बोझ पर जाएगा।""आप चिंता ना करें मां जी मैं सब संभाल लूंगी।"सीमा ने इन लड़कों को टिफिन देना शुरू कर दिया। कुछ दिनों के बाद इनके कुछ और दोस्तों ने भी सीमा से टिफिन लेना शुरू कर दिया। सीमा के हाथ के बने खाने को बच्चों ने काफी पसंद किया और देखते ही देखते सीमा का छोटा सा टिफिन सर्विस सेंटर शुरू हो गया। उसके टिफिन सेंटर की प्रसिद्धि धीरे-धीरे काफी फैल रही थी। अब उसने अपनी सहायता के लिए दो महिलाओं और एक टिफीन पहुंचाने वाले लड़के को भी रख लिया। अब सीमा अपने पति के साथ मिलकर अपने परिवार को अच्छी तरह चलाने लगी । कुछ दिनों के बाद सीमा की ननद सौम्या की शादी तय हो जाती है। विनय और सीमा की सासू मां शादी में होने वाले खर्चों को लेकर थोड़ी चिंता कर रहे थे तभी सीमा वहां आती है और अपने पति के हाथ में 5 लाख रुपए रख देती है। यह पैसे मैंने अपने टिफिन सेंटर की साल भर की बचत से जमा किए हैं ।दोनों पति-पत्नी ने मिलकर बहुत अच्छी तरह से यह शादी संपन्न की। आज सीमा की सास बहुत प्रसन्न थी। सौम्या की शादी मे सीमा के माता पिता और बहनें भी आई थीं। सुलोचना जी ने सीमा की मां रत्ना जी से कहा"बहन जी ,आपने सही कहा था आपकी बेटी सच में लक्ष्मी है। जो अब सही अर्थो में हमारे घर की गृहलक्ष्मी बन चुकी है।"अपनी बेटी की प्रशंसा और तरक्की को देखकर आज उसके माता पिता गर्व महसूस कर रहे थे।
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