शरारती
स्कूल में लंच का पीरियड था। सभी शिक्षक स्टाफ रूम में बैठकर लंच कर रहे थे। तभी.."मैडम रोहन ने मेरा लंच बॉक्स गिरा दिया और टोकने पर मुझे एक चांटा भी मारा।"तुम चलो मैं क्लास में आकर देखती हूं।"समझ में नहीं आता इस रोहन का क्या करें? पूरी क्लास को डिस्टर्ब कर रखा है।मंजू मैडम ने कहा। दूसरे शिक्षकों ने भी उनका समर्थन किया। कभी किसी की किताब किसी और के बैग में, कभी किसी का पेंसिल बॉक्स छुपा देना, कभी किसी बच्चे को मार देना। वाकई नाक में दम कर रखा है। कल उसकी मां मिली थी, कह रही थी कि घर पर भी पढ़ाई पर बिल्कुल ध्यान नहीं देता है।
यह कहानी है, एक छोटे से गांव में रहने वाले बच्चे की,जिसका नाम था रोहन। वह स्कूल में बहुत शरारती था और कभी भी पढ़ाई में ध्यान नहीं देता था। उसकी हरकतों से उसके शिक्षक और साथी विद्यार्थी सभी परेशान रहते थे। अक्सर वह क्लास में हंसी-मजाक करता, पाठों से ध्यान भटकाता, और शिक्षकों के समझाने पर भी कोई फर्क नहीं पड़ता था।
रोहन की शरारतों से तंग आकर एक दिन सभी शिक्षकों ने प्रधानाध्यापक से उसकी शिकायत की।प्रधानाचार्य ने उसे बुलाया और समझाया, लेकिन फिर भी रोहन ने अपनी आदतें नहीं बदलीं।अब सभी ने मान लिया था कि रोहन शायद कभी नहीं सुधरेगा। उसके माता-पिता भी परेशान थे और सोचते थे कि उनके बेटे का भविष्य अंधकारमय है।
एक दिन, स्कूल में एक नए शिक्षक आए जिनका नाम था अजय सर। उन्होंने रोहन को समझने की कोशिश की और उसकी शरारतों के पीछे की वजह जाननी चाही। उन्होंने महसूस किया कि रोहन के मन में बहुत सारी जिज्ञासाएं थीं, लेकिन कोई उन्हें ठीक से समझने की कोशिश नहीं करता था। अजय सर ने रोहन से मित्रता की और उसे प्यार से समझाया कि पढ़ाई केवल एक बोरियत नहीं है बल्कि एक ऐसी चीज है जो उसके सपनों को सच करने में मदद कर सकती है।
अजय सर ने रोहन की ताकत और रुचियों को पहचाना।कुछ विषयों में वह काफी पीछे रह गया था, जिससे आगे की पढ़ाई उसे समझ नहीं आती थी।और वह पाठ पर ध्यान नहीं दे पा रहा था।उन्होंने उसके साथ एक-एक करके विषयों को रुचिपूर्ण तरीके से समझाना शुरू किया। धीरे-धीरे रोहन का ध्यान पढ़ाई में लगने लगा। अब वह शरारतें कम करने लगा और क्लास में दिलचस्पी दिखाने लगा। उसके अंदर एक बदलाव आने लगा।
समय बीता, और रोहन ने अजय सर की मदद और अपने कठिन परिश्रम से पढ़ाई में बहुत सुधार कर लिया। उसने अपनी मेहनत से अच्छे अंक हासिल किए । आज इंटरमीडिएट की परीक्षा में पूरे जिले में उसने तीसरा स्थान प्राप्त किया है। उसके माता-पिता उसे मेडिकल की तैयारी के लिए कोटा भेज रहे हैं। आज वह अपने पुराने विद्यालय में अजय सर का धन्यवाद करने एवं उनका और सभी शिक्षकों का आशीर्वाद लेने आया है।सभी को उम्मीद है कि वह सफल होगा। अब लोग उसे उसकी शरारतों के लिए नहीं बल्कि उसकी मेहनत और ईमानदारी के लिए जानते हैं।
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