आईना

 "देख बेटा, आज फिर से तेरी पत्नी ने घर में क्लेश कर दिया। जाने क्या सीख कर आई है मायके से? बड़े छोटों का लिहाज ही नहीं जब देखो तब जुबान लड़ाना बस! तू थोड़ा उसे ठीक से समझा देना।"तुम चिंता न करो मां, मैं अभी उसकी खबर लेता हूं। कह कर राजीव अपने कमरे में गया।"यह मैं क्या सुन रहा हूं रोहिणी? तुमने आज फिर मां के साथ झगड़ा किया। कितनी बार कहा है तुमसे, मेरे घरवालों की इज्ज़त किया करो।"रोहिणी 1 मिनट के लिए राजीव की बातें सुन खामोश हो जाती है,फिर कहती हैं"मैंने तो सिर्फ इतना कहा था कि छोटी अब 5 साल की हो चुकी है। उसका स्कूल में एडमिशन कराना जरूरी है वरना वह पढ़ाई में पीछे रह जाएगी। तब मां जी कहने लगी, सरकारी स्कूल में एडमिशन करा दे। तब मैंने कहा कि मेरी बेटी सरकारी स्कूल में नहीं जाएगी।इसमें क्या गलत कह दिया मैने।" पत्नी की बात सुनकर राजीव एक पल सकते में आ गया। लेकिन अगले ही पल झल्ला कर बोला "मैं वह सब कुछ नहीं जानता बस तुम मां से बहस नहीं करोगी और बेटी का  एडमिशन मैं देख लूंगा।"यह थे राजीव और उसकी पत्नी रोहिणी। राजीव ने एमबीए किया था और एक अच्छी कंपनी में काम करता था लेकिन कंपनी के काम से ज्यादातर देश के बाहर ही रहता था। उसकी पत्नी अपने सास ससुर और नंद के साथ एक छोटे कस्बे में रहती थी। राजीव का छोटा भाई जिसे राजीव  ने हीं पढ़ाया लिखाया था, अब मुंबई में अच्छी नौकरी करता था। शादी के 2सालों के बाद उनके घर एक बेटी का जन्म हुआ था। रोहिणी के साथ सास ननद का व्यवहार बहुत अच्छा तो कभी नहीं रहा लेकिन फिर भी रिश्ता निभ रहा था। कुछ दिनों बाद उसकी नंद सीमा की शादी तय हो जाती है। शादी का सारा खर्च राजीव ही उठाता है। यहां तक तो कहानी ठीक-ठाक ही चल रही थी। समस्या तब आती है जब कोविड के समय राजीव विदेश से वापस आ जाता  है, उसकी नौकरी छूट जाती है। आज राजीव पिछले 3 सालों से घर पर बेरोजगार बैठा हुआ है। काफी हाथ पांव मारने के बाद भी उसे नई नौकरी नहीं मिल पा रही थी। उनकी बेटी भी बड़ी हो  रही थी। इसी दौरान रोहिणी को एक बेटा भी हो जाता है। अब बच्चों के खर्चे कहां मानने वाले थे। इधर रोहिणी की नंद भी  एक बेटी की मां बन जाती है। बेटी की ससुराल एक ही शहर में होने के कारण रोहिणी की सासू मां अपनी बेटी की की बच्ची के लिए समय-समय पर कपड़े , खिलौने, चाकलेट सब  भेजती रहती थी। लेकिन रोहिणी जब अपने बच्चों के लिए जरूरत की कोई चीज मांगती तो सासू मां हाथ खड़े कर देती ।इसी बात  को लेकर सास बहू में  बकझक हो जाती। राजीव की मां, अपने बेटे को नमक मिर्च लगा कर बातें बताती। राजीव सारा गुस्सा रोहिणी पर उतारता। कभी-कभी तो वह उस पर हाथ भी उठाने लगा था। एक दिन की बात है .. "मांजी,मुन्ने को तेज सर्दी जुकाम हो रहा है, लगता है इसे डॉक्टर के पास ले जाना पड़ेगा।"" अरे बहु बच्चों को बात-बात पर  डॉक्टर के पास नहीं ले जाते । इसके बदन पर गुनगुने  सरसों के तेल की मालिश कर दे आराम आ जाएगा। और जो न आया तो कल जा कर  सरकारी स्वास्थ्य केंद्र में दिखा लाना"। तभी उनकी बेटी का फोन आ जाता है .. क्या कहा गुड़िया की तबीयत ठीक नहीं है? जा करके किसी बच्चों के डॉक्टर  से दिखा ले। नहीं तो तेरे पापा को भेजूं क्या? आज राजीव ने सारी बातें सुन ली थी लेकिन उसके पास पैसे नहीं होने के कारण वह मन मसोस कर रह गया।रोहिणी ने अपने मायके वालो की मदद से अपने बच्चे का इलाज करवाया। कुछ दिनों के बाद राजीव की नई नौकरी लग जाती है। कंपनी उसे दुबई भेज देती है। जैसे ही एक महीने पूरे होते है उसकी मां का फोन आता है।"देख बेटा, जैसे ही तेरी  सैलरी आए, हर महीने अपने बाबूजी के अकाउंट में डाल देना। हमने एक प्लॉट देख रखा है , पैसे जोड़कर उसे खरीद लेंगे।"माफ करना मां, लेकिन अब मैं आप लोगों के अकाउंट में कोई पैसे  नहीं देने वाला,  भाई को पढ़ाया लिखाया,छोटी बहन की शादी करवाई,पूरे परिवार का खर्च उठाया।  लेकिन मैं 3 साल बेरोजगार क्या रहा ? आप लोगों ने तो मेरी पत्नी और बच्चों को छोटी छोटी जरूरतों के लिए तरसा दिया। मेरे बच्चे के खाने पीने और दवाइयां तक का खर्चा उठाने में अपने हाथ खड़े कर दिए। पैसे  तो मैं जरूर जमा करूंगा। लेकिन उससे  शहर में अपना घर खरीदूंगा और ताकि मेरे बच्चे वहां रहकर  अच्छी  शिक्षा प्राप्त कर सकें।"राजीव की मां के पास कोई जवाब नहीं था क्योंकि आज उनके बेटे  ने उन्हें सच्चाई का आइना दिखा दिया था। उन्होंने बिना कुछ बोले फोन कट कर दिया।

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