अमानत

अम्मा, अम्मा, कहती हुई 10 साल की सलोनी स्कूल से लौटती है और बूढ़ी अम्मा उसे अपने सीने से लगा लेती हैं। वैसे तो सलोनी पूरे घर की लाडली है लेकिन बूढ़ी अम्मा जो स्वभाव से थोड़ी कड़क थी, सलोनी पर खूब प्यार लुटाती थी। अम्मा से पूछे बिना उनकी बहू या पोतों की पत्नियां उनके कमरे में जाने की हिम्मत ना करती थी। केवल सलोनी ही थी जो बेधड़क उनके कमरे में जाया करती, खेला करती। सलोनी उनके बड़े पोते की बेटी है। अम्मा आपके बक्से में  हमेशा ताला क्यों लगा रहता है ?और आप इसकी चाबी हमेशा अपनी कमर में क्यों लटका के रखती है? बूढ़ी अम्मा मुस्कुरा कर रह जाती और सलोनी के हाथों में 5 रुपएरखकर कहती, इसकी टॉफी खा लेना। वैसे यह प्रश्न तो सलोनी की मां, दादी और छोटी चाची के मन में भी रहता था पर किसी की हिम्मत ना थी पूछने की ।जाने क्या रखा है अम्मा ने अपने संदूक में ? वे केवल आपस में बड़बड़ा कर ही रह जाती। एक दिन अम्मा के मायके से विवाह का न्योता आया। पहले तो अम्मा ने अपनी उम्र का तकाजा देकर जाने से मना कर दिया लेकिन मायके वालों के काफी मनाने के बाद वह जाने के लिए तैयार हो गई। बहु, विवाह तो दो दिनों के बाद ही हैं लेकिन सोचती हूं जा रही हूं तो दस पंद्रह दिन रुक जाऊं, लेकिन मेरे पीछे तुम सलोनी का ध्यान रखना। जी माजी ,सलोनी की दादी ने जवाब दिया।अम्मा क्या वहां भी अपनी कमर में चाभी। का गुच्छा लेकर जायेंगी?सलोनी की मां और चाची आपस में बात करके खिलखिला पड़ी। लेकिन यह क्या अम्मा ने जाते समय चाभियां 10 साल की नन्ही सलोनी के हाथों में देकर कहा बेटी मेरे आने तक इसे अपने पास संभाल कर रखना।इनकी बुद्धि भ्रष्ट हो गई है क्या ?जो नन्ही सी बच्ची की हाथों में चाभियां देकर जा रही हैं ,छोटी चाची ने धीरे से कहा लेकिन अम्मा से कहने की किसी की हिम्मत कहां थी? सभी महिलाएं केवल आश्चर्य से एक दूसरे का मुंह देखने लगी। और सलोनी उसी समय से चाभियों की हिफाजत करने लगी। मां और चाची ने एक दो बार बहला-फुसलाकर चाभियां मांगनी चाही लेकिन सलोनी ने अम्मा की अमानत को जी जान से संभाल कर रखा। गर्मियों की छुट्टियां थी, सो स्कूल तो बंद थे लेकिन अम्मा की अमानत को संभालने के लिए उसने खेलने जाना भी बंद कर दिया था ऐसे ही पांच ,सात दिन बीत गए। एक दिन दोपहर में सलोनी सो रही थी, तो घर की औरतों ने सोचा कि अच्छा मौका है उसके सिरहाने से चाभियां लेकर अम्मा के बक्से को देखा जाए कि उसमें है क्या? फिर चाभी का गुच्छा वापस रख देंगे किसी को कुछ पता नहीं चलेगा। उनलोगो ने जैसे ही  बक्से को खोला और अम्मा की अमानत को देखती, उसके पहले ही सलोनी वहां आ गई वह छोटी सी बच्ची जोर जोर से रोने लगी, आप लोगों ने अम्मा के बक्से को क्यों खोला? अब मैं क्या जवाब दूंगी अम्मा को? सलोनी को ऐसे रोता देख सभी घबरा गए नहीं नहीं सलोनी हम तो केवल ऐसे ही ।कोई जवाब ना था उनके पास, उधर नन्हीं सलोनी चुप होने का नाम ही नहीं ले रही थी। तभी दरवाजे पर कुछ आहट हुई ,यह क्या बूढ़ी अम्मा तो अचानक से वापस आ गई। रोती हुई सलोनी, बक्से के खुले ताले ,और बहुओ के सफेद पड़े चेहरे को देखकर अम्मा को मामला समझते देर न लगी। सलोनी अम्मा को देखकर उनसे चिपट कर और रोने लगी। अम्मा ने कहा अरे सलोनी बेटा,  तेरे बिना मेरा मन नहीं लग रहा था इसीलिए तो मैं जल्दी वापस आ गई ।पर अम्मा आपकी अमानत ,सलोनी ने सिसकियां लेते हुए कहा। अरे बेटा कुछ जरूरी काम आन पड़ा था मेरे कहने पर ही यह बक्सा खोला है इन्होंने। सच अम्मा! सलोनी ने विस्मय से कहा। हां हां जा हाथ मुंह धो कर आ मैं तेरे लिए ढेर सारी मिठाईयां लाई हूं ।नन्ही सलोनी यह सुनकर दौड़ती हुई हाथ मुंह धोने चली गई, इधर अम्मा की बहुएं सिर झुकाए हुए जमीन की तरफ ताक रही थी।

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