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अस्तित्व

 आज रत्ना  बुआ की 13वीं है। गांव के कई लोग उन्हें श्रद्धांजलि देने के लिए उनकी ससुराल जा रहे हैं। क्योंकि वह किसी एक कि नहीं पूरे गांव की सगी थी। सभी के सभी के सुख-दुख और जरूरत के समय साथ देने वाली बू आ ,मेरी लड़की की शादी में कुछ रुपए कम पर रहे हैं। बुआ, मां को को इलाज के लिए शहर लेकर जाना है कुछ रुपयों की मदद और ऐसे ही ना जाने कितने सवालों को लेकर लोग उनके दरवाजे पर खड़े रहते और बुआ सभी की यथासंभव मदद करती। दादी मां से सुना था की रत्ना बुआ के माता-पिता गांव के संपन्न व्यक्तियों में से थे। तीन भाइयों की इकलौती बहन थी बुआ। उनके सभी भाई शहर में अपने-अपने परिवारों के साथ बस गए थे सबसे छोटी रत्ना बुआ की शादी भी बड़े धूमधाम से एक संपन्न परिवार में की गई। लेकिन लेकिन विवाह के 1 वर्ष के बाद ही उनके पति की एक दुर्घटना में मृत्यु हो गई और ससुराल वालों ने उन्हें अपशकुनी समझकर वापस मायके भेज दिया। बेटी के दुख को देखकर माता-पिता माता-पिता भी अपना आपा खो बैठे थे।लेकिन बुआ  ने जो हुआ उसे अपनी नियति मानकर धीरे-धीरे अपने माता-पिता को संभाला साथ ही लोगों को उन का एक नया रूप देखने को मिला...