संदेश

अगस्त, 2023 की पोस्ट दिखाई जा रही हैं

निर्णय

 अरे पूर्णिमा बेटी मान क्यों नहीं जाती अपने बेटे और बहू की बात। लेकिन अम्मा, लेकिन क्या? आखिर इकलौता बेटा है वह तुम्हारा ,बाद में सारी संपत्ति उसकी ही तो होगी। अम्मा, आप सो जाओ ।काफी रात हो गई है, आपकी तबीयत बिगड़ जाएगी। पूर्णिमा जी अपनी 80 वर्षीय वृद्ध सास से इस विषय पर और बात नहीं करना चाहती थी। अम्मा तो सो गई लेकिन पूर्णिमा जी की आंखों में नींद नहीं थी ।वह अतीत की स्मृतियों में खो गई। आज से 25 वर्ष पहले जब उनके ससुर जी की मृत्यु हुई थी तब से लेकर आज तक उन्होंने अम्मा को ऐसे सहेज रखा था जैसे वह उनकी सास न होकर कोई छोटी बालिका हैं ।उम्र के इस पड़ाव में जीवनसाथी से अलगाव के बाद यदि बच्चे साथ ना दे तो अकेलेपन का यह दंश जीवन को कितना कठिन बना देता है। इस बात को अच्छी तरह समझती थी पूर्णिमा। इसलिए उसने अम्मा को आज तक किसी बात की कोई कमी नहीं होने दी। पूर्णिमा के पति रमेश जी एक सरकारी बैंक में मैनेजर थे।  दोनों का इकलौता बेटा था सौरभ,मां बाप ने बड़े ही लाड दुलार से उसका पालन पोषण किया था। सौरभ के एमबीए कंप्लीट करते ही एक अच्छी कंपनी में उसकी नौकरी लग गई ।रमेश जी और पूर्णिमा ने अपने...