तीर्थयात्रा
तीर्थयात्रा अरे, तू क्या जाएगी तीर्थ यात्रा पर, तीर्थ यात्रा पर तो मैं जाऊंगी देख छोटी हमारे तुम्हारे पति तो इतना ही कमाते हैं जितने में हमारी दाल रोटी चल जाए। ऊपर से तु ठहरी एक बेटी की मां, उसके शादी ब्याह ,हजार तरह के खर्चे तू तो अभी से ही उस पर ध्यान दे । हां मेरी बात अलग है क्योंकि मेरे दो बेटे हैं, ये बड़े होकर पैसे कमाएंगे और मुझे देश दुनिया ,तीरथ धाम सब घुमाएंगे। कसिया को उसकी जेठानी ने समझाते हुए कहा। कसिया ने भी मन मसोसते हुए सोचा जीजी ठीक ही कहती है। पास ही खेल रही उसकी 11 साल की बेटी राधिका जिसे सब रधिया कहकर बुलाते थे मां और ताई जी की बातें ध्यान से सुन रही थी। उसने मां और ताई जी की यह बातें कई बार पहले भी सुनी थी। खैर समय गुजरता गया । रधिया ने आठवीं तक की पढ़ाई के बाद स्कूल जाना छोड़ दिया और मां के साथ मेहनत मजदूरी करने जाने लगी। भगवान ने उसे अच्छा रूप रंग तो दिया ही था वह बड़ी मेहनत और लगन से काम भी करती थी। एक दिन रधिया के पिता ने उसकी मां से कहा अजी सुनती हो, पास के गांव से अपनी रधिया के लिए एक रिश्ता आया है। लडके के माता-प...